नई दिल्ली।
भारतीय पत्रकारिता और रेडियो प्रसारण जगत की सबसे विश्वसनीय, प्रभावशाली और स्नेहिल आवाज़ों में से एक सर विलियम मार्क टुली, KBE का मंगलवार 25 जनवरी 2026 को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के मैक्स अस्पताल, साकेत में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के टॉलीगंज क्षेत्र में ब्रिटिश माता-पिता के घर जन्मे मार्क टुली का बचपन भारत में ही बीता। बाद में उन्हें शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेजा गया, जहाँ उन्होंने मार्लबरो कॉलेज और ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज से पढ़ाई की। हालांकि, भारत उनके जीवन और कर्म का केंद्र बना रहा।
वर्ष 1964 में बीबीसी के भारत संवाददाता के रूप में भारत लौटने के बाद मार्क टुली ने पत्रकारिता में एक नया मानदंड स्थापित किया। वे आगे चलकर बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख बने और लगभग तीन दशकों तक इस पद पर रहते हुए भारतीय राजनीति, समाज और लोकतंत्र के अहम पड़ावों को दुनिया के सामने निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ रखा। उन्होंने 1994 में बीबीसी से इस्तीफा दिया।
मार्क टुली ने भारत के आधुनिक इतिहास की कई निर्णायक घटनाओं की रिपोर्टिंग की—
1975–77 का आपातकाल, ऑपरेशन ब्लू स्टार, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद हुए सिख विरोधी दंगे, 1992 का बाबरी मस्जिद विध्वंस, आर्थिक उदारीकरण, चुनावी राजनीति और सामाजिक उथल-पुथल। उनकी रिपोर्टिंग में सनसनी नहीं, बल्कि संतुलन, मानवीय दृष्टि और गहरी समझ होती थी। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और “From Our Own Correspondent” कार्यक्रम में उनकी शांत, भरोसेमंद आवाज़ पर पीढ़ियों ने विश्वास किया।
आपातकाल के दौरान उन्हें भारत से निष्कासित भी किया गया, हालांकि बाद में उनकी वापसी हुई। उन्हें कभी भारतीय राष्ट्रवादियों तो कभी ब्रिटिश सत्ता प्रतिष्ठान की आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निष्पक्ष और साहसी पत्रकारिता से कभी समझौता नहीं किया।
उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए
ब्रिटेन ने 2002 में उन्हें ‘नाइटहुड (KBE)’ से सम्मानित किया,
जबकि भारत सरकार ने 2005 में उन्हें पद्मश्री प्रदान किया—यह सम्मान दोनों देशों से मिला दुर्लभ नागरिक सम्मान था।
बीबीसी से अलग होने के बाद भी मार्क टुली लेखन में सक्रिय रहे। उनकी चर्चित पुस्तकों में
No Full Stops in India, The Heart of India, India in Slow Motion, India: The Road Ahead सहित कई कृतियाँ शामिल हैं। उनकी रचनाओं में भारत के बदलते चेहरे का स्नेहिल लेकिन यथार्थ चित्रण मिलता है।
मार्क टुली ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा नई दिल्ली और मैक्लॉडगंज में बिताया। वे आम लोगों से संवाद करते, गलियों में चलते और भारत की विविधता को जिज्ञासा व सम्मान के साथ समझते रहे। एक आस्थावान ईसाई होने के बावजूद वे भारतीय बहुलतावाद और आध्यात्मिक सह-अस्तित्व में गहरी आस्था रखते थे।
भारत ने आज एक ऐसे पत्रकार को खो दिया है, जिसने देश को केवल रिपोर्ट नहीं किया, बल्कि उसे सुना, समझा और प्रेम किया।
मार्क टुली की विरासत उनकी कहानियों, उनकी विश्वसनीयता और उनकी गरिमामयी पत्रकारिता में सदैव जीवित रहेगी।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।
ॐ शांति।
