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🌿 IPAR: उत्तराखण्ड में सुगंधित क्रांति का नया अध्याय

Selaqui, Dehradun में स्थित पूर्व “CAP” अब नए नाम— IPAR (Institute of Perfumery and Aromatic Research) —के साथ एक बड़े विज़न की ओर बढ़ चुका है।

उत्तराखण्ड सरकार ने सुगंधित पौधों, आवश्यक तेलों, परफ्यूमरी और एरोमैटिक रिसर्च को वैश्विक मानकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से इस संस्थान को नई पहचान दी है। नया नाम सिर्फ एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य के अरोमा वैली मिशन, किसानों की आय बढ़ाने, और जड़ी-बूटी आधारित उद्योगों को नई दिशा देने का प्रतीक है।


🌱 IPAR की जरूरत क्यों?

विश्व बाज़ार में सुगंधित तेलों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

उत्तराखण्ड की धरती में लेमनग्रास, सिट्रोनेला, जावा मिंट, रेज़िन, तेजपत्ता, कपूर कचरी जैसे पौधों की अपार संभावनाएँ हैं।

वैज्ञानिक रिसर्च, आधुनिक डिस्टिलेशन तकनीक और मूल्य संवर्धन (value addition) की अब आवश्यकता पहले से अधिक है।

IPAR इन्हीं संभावनाओं को वास्तविक उद्योग में बदलने का केंद्र बनेगा।


🔬 IPAR से क्या बदलेगा?

परफ्यूमरी और एरोमा साइंस में उन्नत शोध

किसानों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण

नई हाई-वैल्यू प्रजातियों का विकास

आवश्यक तेलों की गुणवत्ता, शुद्धता और मानकीकरण

स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच


👩‍🌾 किसानों के लिए बड़ा अवसर

IPAR का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में

एरोमा खेती बढ़े

प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार हो

युवाओं को रोजगार मिले

“Farm to Fragrance” मॉडल विकसित हो


🌍 उत्तराखण्ड: भारत का नया ‘Aroma Hub’

देहरादून का IPAR आने वाले वर्षों में भारत ही नहीं, दक्षिण एशिया का प्रमुख परफ्यूमरी और एरोमैटिक रिसर्च सेंटर बनने की क्षमता रखता है—
यही कारण है कि राज्य सरकार ने इसे नई पहचान और नया मिशन दिया है।


✨ IPAR — नई पहचान, नया नजरिया, नई दिशा।

यह सिर्फ एक संस्थान नहीं, उत्तराखण्ड के अरोमा सेक्टर का भविष्य है।


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By udaen

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