
गुंजी, उत्तराखंड — जब कर्नल (रिटायर्ड) यशपाल बीना नेगी ने अपने गाँव लौटकर ग्राम प्रधान बनने का निर्णय लिया, तब पूरे उत्तराखंड में यह मिसाल बनी कि कैसे देश सेवा से रिटायर हुए अधिकारी समाज सेवा की अगली पारी शुरू कर सकते हैं। अब इस कड़ी को आगे बढ़ाया है भारतीय पुलिस सेवा की निवृत्त अधिकारी विमला गुंज्याल ने, जो गुंजी गाँव (जिला पिथौरागढ़) में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गई हैं।
लेकिन यह सिर्फ एक चुनावी खबर नहीं है — यह उत्तराखंड की लोकतांत्रिक चेतना और गाँवों की बदलती सोच की सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है।
नौकरी से निवृत्ति नहीं, सामाजिक पुनर्जागरण की शुरुआत
विमला गुंज्याल ने उत्तराखंड पुलिस सेवा में दशकों तक सेवा दी। एक संवेदनशील और अनुशासित अधिकारी के रूप में उन्होंने नारी सुरक्षा, ग्रामीण अपराध नियंत्रण, और महिला सशक्तिकरण के कई प्रभावी अभियान चलाए। अब, सेवा निवृत्ति के बाद, उन्होंने अपने मूल गाँव गुंजी में लौटकर वहाँ की सामाजिक ज़िम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया — न किसी राजनीतिक दल के समर्थन से, न किसी प्रचार तंत्र के ज़रिए, बल्कि एक नीरव विश्वास और लोक आशीर्वाद से।
निर्विरोध चुनाव: विश्वास की सबसे बड़ी जीत
यह बात उल्लेखनीय है कि उन्हें निर्विरोध चुना गया। यह स्वयं में एक बहुत बड़ा संदेश है — जहाँ अधिकांश ग्रामीण चुनाव टकराव, गुटबाज़ी और मतभेद से भरे होते हैं, वहाँ एक सेवानिवृत्त महिला अधिकारी को सर्वसम्मति से चुना जाना यह दर्शाता है कि गाँव बदलाव चाहता है, और जनता अब प्रशासनिक अनुभव, पारदर्शिता और सेवा भावना को तरजीह दे रही है।
गुंजी: सीमांत गाँव की नई पहचान
गुंजी गाँव भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित एक सामरिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण गाँव है। न केवल इसका सामरिक महत्व है, बल्कि यह कैलाश मानसरोवर यात्रा और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का भी केंद्र है। ऐसे गाँव में विमला गुंज्याल का नेतृत्व विकास और सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में नया मार्ग खोलेगा।
महिला नेतृत्व की मिसाल
उत्तराखंड की महिलाएं पारंपरिक रूप से समाज और परिवार की रीढ़ रही हैं, लेकिन पंचायत राजनीति में ऐसे शिक्षित, अनुभवी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाली महिला का निर्विरोध आना न केवल लैंगिक समानता बल्कि गुणवत्ता युक्त नेतृत्व का संकेत भी है।
विमला गुंज्याल का संदेश
उनके पहले वक्तव्य में उन्होंने कहा —
“मैं यहाँ राजनीति करने नहीं, सेवा करने आई हूँ। गाँव के बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग अब मेरी ज़िम्मेदारी हैं। शासन में जो मैंने सीखा, अब वो अपने गाँव के लिए समर्पित करना चाहती हूँ।”
नवाचार की संभावना
ऐसे नेतृत्व से उम्मीद की जा सकती है कि:
ग्राम सुरक्षा योजना को मज़बूत किया जाएगा
महिलाओं के लिए स्वरोज़गार और आत्मनिर्भरता कार्यक्रम शुरू होंगे
स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर ठोस काम होगा
युवाओं को प्रशासनिक और रक्षा सेवा की दिशा में प्रेरणा मिलेगी
विमला गुंज्याल का निर्विरोध ग्राम प्रधान बनना एक सामान्य पंचायत चुनाव नहीं है। यह एक प्रतीक है — उस बदलाव का, जो उत्तराखंड के गाँवों में चुपचाप आकार ले रहा है। यह उस भविष्य की आहट है, जहाँ सेवानिवृत्त अफ़सरशाही अपने अनुभव को गाँव की मिट्टी में मिलाकर उसे सोना बना रही है।
यह ख़बर नहीं, क्रांति की नींव है।
