नई दिल्ली। सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार एक नई ‘सोशल मीडिया आचार संहिता’ लाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के बीच ड्यूटी के दौरान निजी रील्स देखने, वीडियो बनाने, स्टोरी और व्यक्तिगत राय साझा करने का चलन बढ़ने के बीच यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ बातचीत के दौरान सरकारी अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने इस सप्ताह नौकरशाहों के साथ साझा संदेश में बैठक में सामने आए प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया।
अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बनेगी स्पष्ट नीति
मौजूदा सरकारी सेवा आचरण नियम उस दौर में बनाए गए थे, जब सोशल मीडिया का अस्तित्व या उसका प्रभाव आज जैसा व्यापक नहीं था। ऐसे में अधिकारियों के निजी सोशल मीडिया अकाउंट, रील्स, वीडियो, पोस्ट और सरकारी पद से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर स्पष्ट और एकरूप दिशा-निर्देशों की जरूरत महसूस की जा रही है।
खासकर ऐसे मामलों पर चिंता जताई गई है, जहां अधिकारी अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने पद, सरकारी काम या उपलब्धियों का व्यक्तिगत प्रचार करते दिखाई देते हैं। सरकारी पद पर रहते हुए व्यक्तिगत ब्रांडिंग और आधिकारिक जिम्मेदारियों के बीच अंतर बनाए रखना प्रशासनिक निष्पक्षता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रस्तावित आचार संहिता में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि अधिकारी ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस सीमा तक कर सकते हैं, सरकारी पद और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों के बीच किस तरह की दूरी रखनी होगी और सरकारी कार्यों से संबंधित सामग्री साझा करने के क्या नियम होंगे।
‘रील कल्चर’ ने बढ़ाई चिंता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील्स और शॉर्ट वीडियो की लोकप्रियता ने सरकारी कार्यालयों में भी इसके इस्तेमाल को बढ़ाया है। अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सवाल केवल निजी पोस्ट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी चिंता है कि कहीं सोशल मीडिया की गतिविधियां सरकारी कामकाज और उत्पादकता को प्रभावित न करें।
हालांकि, प्रस्तावित कोड का उद्देश्य सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और मर्यादित डिजिटल व्यवहार के लिए स्पष्ट व्यवस्था तैयार करना माना जा रहा है।
‘एक भारत’ पोर्टल से एक लॉगिन पर सरकारी सेवाएं?
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए एक यूनिफाइड सर्विस डिलीवरी प्लेटफॉर्म ‘एक भारत’ पोर्टल को जल्द शुरू करने की दिशा में भी काम करने को कहा है।
फिलहाल अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए नागरिकों को विभिन्न विभागों की वेबसाइटों पर जाना पड़ता है। कई जगह अलग-अलग यूजरनेम और पासवर्ड की जरूरत होती है। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म का उद्देश्य इस प्रक्रिया को आसान बनाना है।
इसके तहत नागरिकों को एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने और एक ही यूजरनेम-पासवर्ड से कई सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करने की व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
बताया गया है कि इस संबंध में संबंधित विभागों के बीच कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं।
डिजिटल प्रशासन के साथ डिजिटल अनुशासन
सरकार की दोनों पहलों को एक साथ देखा जाए तो इसका फोकस केवल तकनीक के विस्तार पर नहीं, बल्कि डिजिटल प्रशासन में अनुशासन और नागरिक सुविधा बढ़ाने पर भी है।
एक तरफ सरकार नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए नए नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, अंतिम सोशल मीडिया आचार संहिता में किन गतिविधियों पर रोक होगी, अधिकारियों को क्या अनुमति मिलेगी और नियमों का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई होगी, इसका स्पष्ट स्वरूप सरकार द्वारा औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद ही सामने आएगा।
