Spread the love

दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने 21 परिवारों को अपूरणीय पीड़ा दी है। इस त्रासदी में 21 लोगों की जान चली गई और पूरे देश में शोक तथा आक्रोश का माहौल है। ऐसे मामलों में स्वाभाविक रूप से जनता यह अपेक्षा करती है कि दोषियों की पहचान हो और उन्हें कठोर दंड मिले। लेकिन न्याय का मूल सिद्धांत यह भी कहता है कि जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की तय होनी चाहिए जो वास्तव में उसके लिए उत्तरदायी हो।इसी संदर्भ में उत्तराखंड के रहने वाले शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केशव नेगी उस प्रतिष्ठान में एक कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और उनकी जिम्मेदारी रसोई में भोजन तैयार करने तक सीमित थी। यदि यह तथ्य सही है, तो यह समझना आवश्यक है कि क्या किसी कर्मचारी को भवन की वैधता, अग्नि सुरक्षा मानकों, फायर एनओसी, आपातकालीन निकास व्यवस्था और प्रशासनिक अनुमति जैसे विषयों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?यदि भवन में अवैध निर्माण हुआ, अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई, फायर एनओसी नहीं ली गई, क्षमता से अधिक लोगों को प्रवेश दिया गया या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, तो प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी भवन स्वामी, संचालक, प्रबंधन और उन अधिकारियों की बनती है जिन पर नियमों के अनुपालन की निगरानी का दायित्व था। ऐसे में केवल एक कर्मचारी की गिरफ्तारी से यह आशंका पैदा होती है कि कहीं जांच का फोकस वास्तविक जवाबदेह लोगों से हटकर सबसे कमजोर कड़ी पर तो नहीं डाल दिया गया है।यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि जिस स्थान पर यह गतिविधि संचालित हो रही थी, वह क्षेत्र मूल रूप से रिहायशी था या व्यावसायिक। यदि रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं तो संबंधित अनुमति किसने दी? स्थानीय निकायों, अग्निशमन विभाग और अन्य नियामक एजेंसियों ने समय रहते निरीक्षण क्यों नहीं किया? यदि नियमों का उल्लंघन वर्षों से जारी था, तो प्रशासनिक तंत्र की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।निस्संदेह, 21 लोगों की मौत एक गंभीर अपराध और प्रशासनिक विफलता दोनों की ओर संकेत करती है। मृतकों और उनके परिजनों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन न्याय का अर्थ केवल किसी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है। न्याय का वास्तविक अर्थ है—दुर्घटना के मूल कारणों की पहचान, जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संस्थागत सुधार।उत्तराखंड सरकार, संबंधित सांसदों तथा जनप्रतिनिधियों को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि केशव नेगी सहित सभी आरोपितों को निष्पक्ष सुनवाई और उचित कानूनी सहायता प्राप्त हो। साथ ही जांच एजेंसियों पर यह नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वे केवल आसान लक्ष्य खोजने के बजाय उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंचें जिनकी लापरवाही या भूमिका इस त्रासदी के लिए वास्तव में जिम्मेदार हो सकती है।किसी भी लोकतांत्रिक समाज में न्याय की कसौटी यही होती है कि जांच सबसे कमजोर व्यक्ति पर नहीं रुकती, बल्कि सबसे प्रभावशाली और वास्तविक जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचती है। मालवीय नगर अग्निकांड की जांच भी इसी कसौटी पर परखी जाएगी।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *