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भारतीय लोककलाओं और पारंपरिक कौशल का संवर्धन

PIB Delhi

भारत सरकार ने पूरे देश में लोक कला और संस्कृति के विभिन्न रूपों की रक्षा, संवर्धन और संरक्षण के लिए सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) स्थापित किए हैं, इनमें पारंपरिक कौशल भी शामिल हैं। इनके मुख्यालय पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में हैं। ये जेडसीसी पूरे भारत में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इनमें लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर दिया जाता है। इन कलाकारों को मानदेय, यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता, स्थानीय परिवहन, आवास आदि की सुविधा दी जाती है ताकि वे अपनी आजीविका अर्जित कर सकें।

देश की पारंपरिक कला और कौशल को बढ़ावा देने के लिए, ये जेडसीसी शिल्पग्राम उत्सव, ऑक्टेव, चंडीगढ़ राष्ट्रीय शिल्प मेला, ऑरेंज सिटी शिल्प मेला, राष्ट्रीय शिल्प मेला, सलंगाई नादम, पूर्वांचलीय लोक महोत्सव, हॉर्नबिल महोत्सव, लोकोत्सव, संगाई महोत्सव आदि जैसे कई सांस्कृतिक कार्यक्रम/ त्योहारों का आयोजन करते हैं।

इसके अलावा, संस्कृति मंत्रालय इन जेडसीसी के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव (आरएसएम) का आयोजन भी करता है, जिसमें पूरे भारत से स्थानीय कलाकारों सहित बड़ी संख्या में लोक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। इन आरएसएम के दौरान कई स्टॉल भी लगाए जाते हैं, जहां देश के विभिन्न हिस्सों के कारीगर, जिनमें स्थानीय कारीगर भी शामिल हैं, अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करते हैं, जिससे वे अपनी आजीविका अर्जित करते हैं।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय देश भर में हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास और संवर्धन के लिए दो योजनाएं : राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम ( एनएचडीपी ) और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना ( सीएचसीडीएस ) कार्यान्वित करता है। इन योजनाओं के तहत, कारीगरों को विपणन कार्यक्रमों, कौशल विकास, क्लस्टर विकास, उत्पादक कंपनियों के गठन, कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ, अवसंरचना और प्रौद्योगिकी सहायता, अनुसंधान एवं विकास सहायता, डिजिटलीकरण, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हस्तशिल्प उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन आदि के माध्यम से संपूर्ण सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यकता आधारित वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे देश भर के पारंपरिक शिल्पों और कारीगरों को लाभ होता है।

जेडसीसी हमारी लोक कलाओं को संरक्षित करने, दस्तावेज बनाने और उत्साही लोगों और कलाकारों की नई पीढ़ी के बीच प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सभी जेडसीसी शोध और दस्तावेजीकरण से संबंधित कार्य करते हैं जो संगीत, नृत्य, रंगमंच, साहित्य और ललित कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लुप्त हो रही दृश्य और प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में सहायक होते हैं। यह पहल इन परंपराओं को मुद्रित और श्रव्य-दृश्य दोनों प्रारूपों में प्रलेखित करती है और कला रूपों का चयन राज्य सांस्कृतिक विभागों के परामर्श से किया जाता है।

सभी जेडसीसी गुरु-शिष्य परंपरा योजना भी चलाते हैं, जहां पारंपरिक गुरु युवा शिष्यों को प्रशिक्षित करते हैं ताकि सांस्कृतिक ज्ञान की निरंतरता सुनिश्चित हो सके, जो कलाकारों, शोधकर्ताओं और परंपराओं के सामुदायिक वाहकों की मदद करता है।


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By udaen

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