प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकरण योजना को लागू करना
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकरण योजना के तहत लाभार्थर्थियों तक पहुंच
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकरण (पीएमएफएमई) योजना की स्थिति
PIB Delhi
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) देश में नए सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को शुरू करने/अपग्रेड करने के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यवसाय समर्थन देने के लिए के केंद्र प्रायोजित “प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकरण (पीएमएफएमई) स्कीम” को लागू कर रहा है। इस स्कीम का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के असंगठित क्षेत्र में माइक्रो-एंटरप्राइज़ेज़ की स्पर्धा क्षमता को बढ़ाना और क्षेत्र को औपचारिक रूप देने को बढ़ावा देना है। पीएमएफएमई स्कीम के तहत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का विवरण अनुलग्नक में हैं।
पीएमएफएमई योजना के तहत, 31 अक्टूबर 2025 तक 1363 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), 236 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और 1,61,072 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी के लिए ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में वोकल फॉर लोकल (स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन) पहल को बढ़ावा देने के लिए, पीएमएफएमई योजना मुख्य रूप से देश के सभी जिलों में संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) दृष्टिकोण को अपनाती है। इस पहल का उद्देश्य सभी क्षेत्रों में समग्र सामाजिक आर्थिक विकास को सक्षम करने के लिए देश के प्रत्येक जिले (एक जिला एक उत्पाद) से कम से कम एक उत्पाद का चयन, ब्रांडिंग और प्रचार करना है। ओडीओपी पहल के तहत, सभी उत्पादों का चयन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा व्यवहारिक धरातल पर मौजूदा पारिस्थितिकी तंत्र, जिलों के तहत पहचाने गए उत्पादों को ध्यान में रखकर किया गया है। इस स्कीम के तहत GI-टैग वाले उत्पादों सहित 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 726 ज़िलों के लिए ओडीओपी को मंज़ूरी दी गई है।
पीएमएफएमई स्कीम ग्रामीण आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा और वैल्यू चेन को मज़बूत करने के लिए मुख्य प्रेरक का काम करती है। यह माइक्रो-एंटरप्राइज़ को बढ़ाकर और उन्हें औपचारिक बनाकर, स्थानीय रोज़गार उपलब्ध करके, खासकर एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए, और उद्यमिता को बढ़ावा देकर काम करती है। यह फ़सल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करके, प्रोसेसिंग एफिशिएंसी बढ़ाकर, ओडीओपी और अन्य कृषि खाद्य उत्पादों की शेल्फ़ लाइफ़ बढ़ाकर और पूरे साल सुरक्षित, पौष्टिक खाना उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा में सुधार करती है। यह स्कीम ज़िले के हिसाब से ओडीओपी हस्तक्षेप को बढ़ावा देकर, क्रेडिट और क्षमता निर्माण के ज़रिए प्रौद्योगिकी अपनाने में मदद करके, कुशल एग्रीगेशन और प्रोसेसिंग के लिए साझा अवसंरचना बनाकर, और ई-कॉमर्स, रिटेल और इंस्टीट्यूशनल खरीदारों के साथ लिंकेज के ज़रिए बेहतर बाज़ार एकीकरण को मुमकिन बनाकर वैल्यू चेन को भी मज़बूत करती है।
यह जानकारी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
