स्थान- समरकंद, उज्बेकिस्तान
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5 अप्रैल 2025 को स्वराज विमर्श यात्रा जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी के नेतृत्व में समरकंद, क्लाइमेट फोरम इंटरनेशनल कांफ्रेंस में रही। यहां जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी की उज्बेकिस्तान के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बातचीत की। इस बातचीत में जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी ने यहां की खेती में बदलाव और प्राकृतिक बदलाव लाने, अमु और शुभ दरिया को पुनर्जीवित करने तथा आरएलसी को पानीदार बनाने के गंभीर विषय पर लंबी चर्चा हुई।
जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी ने कहा कि, यह देश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध और भाग्यशाली देश है। यहां पर एक तरफ हिमालय का बड़ा हिस्सा जिसमें ग्लेशियर का पानी है और दूसरा इस देश की वर्षा का पानी पर्याप्त है। लेकिन इस पानी को एक कुशलता दक्षता पूर्वक प्रबंधन करने की जरूरत है। इस देश को अपने को पानीदार बनाए रखने हेतु वर्षा जल का संरक्षण और जल का अनुशासित होकर दक्षता पूर्ण उपयोग करना होगा, जिससे कम जल की खपत में अधिक उत्पादन किया जा सके। उत्पादन भी बना रहे और वर्षा जल भी नदियों में बहता रहे। यह उज्बेकिस्तान के वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए शुभ होगा। इस काम में तरुण भारत संघ का पिछले 50 वर्षों का नदी पुनर्जीवन का अनुभव बहुत उपयोगी हो सकता है।
तरुण भारत संघ ने पिछले 50 वर्षों में अपने काम से 23 नदियों को पुनर्जीवित करने का काम किया है। चंबल के बगिया की बंदूक के छुड़ाकर, उन्हें किसान बनाने का काम किया है। पानी का काम एक तरफ समाज को पुनर्जीवित करने और दूसरी तरफ प्रकृति को समृद्ध बनाने का काम है।
आगे कहा कि, उज्बेकिस्तान में पानी, प्रकृति और नदियां इन तीनों को अब इस आधुनिक तरीके से प्रबंध करने की अत्यंत आवश्यकता है। अभी यहां पानी जरूरत से ज्यादा है लेकिन लालच के कारण कपास की खेती में जल का अति उपयोग करने के कारण दो बड़ी नदियां सूख कर मर गई और अब समुद्र भी सूखने लगा है। ऐसा आगे ना हो उसके लिए यहां की खेती के फसल चक्र को वर्षा चक्र के साथ जोड़ना अत्यंत जरूरी है।
यहां भारत की राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश राय जी से जलपुरुष जी ने मुलाकात की और “Climate resilient socioeconomic growth through water conservation ” व पानी पंचायत पुस्तक भी भेंट की.
