📰 उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 140 पात्र कैदियों की रिहाई में देरी पर जताई कड़ी नाराज़गी, दो हफ्ते में बोर्ड गठन का आदेश
नैनीताल, 28 जून 2025 | संवाददाता: उद्यान न्यूज़ नेटवर्क (Udaen News Network)
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में 5-6 वर्षों से बंद 140 रिहाई के पात्र कैदियों की रिहाई में हो रही बेतहाशा देरी पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने इसे प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकारी बोर्ड का गठन कर रिहाई की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
📌 क्या है मामला?
शनिवार को मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष यह मामला प्रस्तुत हुआ, जिसमें एक विस्तृत रिपोर्ट के माध्यम से यह बताया गया कि 140 ऐसे कैदी हैं जो सरकार की नीतियों के अनुसार रिहाई के पूर्णतः पात्र हैं, लेकिन फिर भी वर्षों से जेलों में बंद हैं।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इनमें से तीन कैदी तो वर्ष 2019, 2020 और 2021 से ही रिहाई के योग्य हैं। बावजूद इसके उन्हें अब तक कोई कानूनी राहत नहीं मिली।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी:
न्यायालय ने कहा कि –
“राष्ट्रीय, राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के निरंतर प्रयासों के बावजूद इन कैदियों को रिहा नहीं किया गया है, जो सीधे-सीधे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “यह प्रशासनिक लापरवाही और मानवीय संवेदनशीलता की घोर कमी को दर्शाता है।”
🧾 क्या कहती है सरकार की नीति?
सरकार की रिहाई नीति के अनुसार, ऐसे कैदी जो एक निश्चित अवधि की सजा पूरी कर चुके हैं या अच्छे आचरण के आधार पर छूट के पात्र हैं, उन्हें समय-समय पर गठित Sentence Review Board की संस्तुति पर रिहा किया जाना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में वर्षों से ठहराव बना हुआ है।
🚨 अब क्या हुआ आदेश?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि—
- दो सप्ताह में Sentence Review Board का गठन किया जाए।
- 140 कैदियों की समीक्षा प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
- रिहाई की पूरी कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूरी की जाए।
📣 जन संगठनों की प्रतिक्रिया:
Udaen Foundation और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह उत्तराखंड की न्याय प्रणाली के लिए मानवीय और संवेदनशील दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
“यह सिर्फ कैदियों की नहीं, बल्कि न्याय के उस सिद्धांत की रिहाई है, जो कहता है कि न्याय में देरी, अन्याय होती है।” — दिनेश गुसाईं, अध्यक्ष, उद्यान फाउंडेशन
🕊️ क्या है अगला कदम?
अब निगाहें इस बात पर होंगी कि—
- राज्य सरकार कितनी तत्परता से बोर्ड का गठन करती है।
- क्या सभी पात्र कैदियों को समय पर न्याय मिलेगा?
- क्या आगे से जेलों में रिहाई प्रक्रिया को नियमित किया जाएगा?
🔎 विशेष टिप्पणी:
“उत्तराखंड की जेलों में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इन 140 कैदियों की पीड़ा यह दर्शाती है कि प्रशासनिक चुप्पी भी कई बार एक धीमा जहर बन जाती है। हाईकोर्ट का यह आदेश उन सभी आवाज़ों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सालों से ‘रिहाई की तारीख’ का इंतज़ार कर रहे थे।”
