1️⃣ वित्तीय चुनौतियाँ:
🔸 बजट संकट:
- राज्य में मिशन के तहत किए गए कार्यों का 4,000 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान लंबित है।
- केंद्र सरकार से बजट जारी होने में देरी के कारण 1,000 से अधिक पेयजल योजनाएँ प्रभावित हुई हैं।
- 31 मार्च 2025 की समय सीमा है, लेकिन वित्तीय संकट के कारण कई परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।
🔸 लागत और बजट में अंतर:
- पहाड़ी क्षेत्रों में जल परियोजनाओं की लागत मैदानी इलाकों की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
- ऊँचाई वाले इलाकों में पाइपलाइन बिछाने, जल पंपिंग और रखरखाव पर ज्यादा खर्च आता है, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है।
🔸 भुगतान में देरी:
- राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन के ठेकेदारों और कर्मचारियों के भुगतान में देरी की समस्या स्वीकार की है।
- इससे नए ठेकेदार काम करने से हिचकिचा रहे हैं, जिससे परियोजनाओं की गति धीमी हो रही है।
2️⃣ प्रबंधकीय (मैनेजमेंट) चुनौतियाँ:
🔹 कार्य की गुणवत्ता और जांच:
- दिसंबर 2024 में, सरकार ने 14.50 लाख जल कनेक्शनों की गहन जाँच के आदेश दिए।
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि जल आपूर्ति वास्तव में हो रही है या नहीं।
- पहले की कई योजनाओं में कम गुणवत्ता वाली पाइप और अधूरी परियोजनाओं की शिकायतें मिली हैं।
🔹 पारदर्शिता की कमी:
- कुछ स्थानों पर अनुबंधों में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी की रिपोर्ट सामने आई है।
- टेंडर प्रक्रिया और फंड के वितरण में अधिक निगरानी की आवश्यकता है।
🔹 तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याएँ:
- पहाड़ी इलाकों में जल स्रोतों तक पाइपलाइन पहुँचाना कठिन है।
- भूस्खलन, बर्फबारी और जंगली जानवरों के कारण पाइपलाइन को बार-बार नुकसान होता है।
- दूरस्थ गाँवों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप और स्मार्ट मीटर जैसी नई तकनीकों की जरूरत है।
समाधान के संभावित तरीके:
✔ केंद्र से अग्रिम बजट जारी कराने की कोशिशें – वित्तीय संकट को हल करने के लिए राज्य सरकार को केंद्र पर अधिक दबाव डालना होगा।
✔ स्थानीय जल समितियों (VWSC) को सशक्त बनाना – गाँव स्तर पर जल प्रबंधन को बेहतर बनाने से योजनाओं की सफलता बढ़ सकती है।
✔ IoT और स्मार्ट मीटरिंग – जल आपूर्ति और लीकेज पर निगरानी रखने के लिए नई तकनीक अपनाने की जरूरत है।
✔ ट्रांसपेरेंसी और डिजिटल ट्रैकिंग – मिशन से जुड़े ठेके और भुगतान प्रक्रिया को ऑनलाइन सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना चाहिए।
निष्कर्ष:
जल जीवन मिशन उत्तराखंड में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज कर रहा है, लेकिन वित्तीय संकट, भ्रष्टाचार और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसके कार्यान्वयन में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यदि सही प्रबंधन और नई तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो यह मिशन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है। 🚰✨
