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वर्तमान में कोविड 19 की चल रही महामारी ने लॉकडाउन के कारण सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया है, जिससे सैकड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं और जो पत्रकार, लोकतंत्र के मशाल वाहक, चौथे महत्वपूर्ण स्तंभ का प्रतिनिधित्व करते है उन्हें मीडिया हाउस के प्रबंधक अचानक अगले दिन से काम पर नहीं आने के लिए कह रहे हैं। ।

कई मीडिया हाउस, प्रिंट के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक चैनलों की कथित तौर पर अखिल भारतीय स्तर पर मीडियाकर्मियों की नौकरियां छीनने की खबरें आई हैं, जो पत्रकारों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के जीवन को संकट में डाल देती हैं।

हालिया मामला राज्यसभा टेलीविजन के पत्रकारों सहित लगभग सैंतीस मीडिया कर्मचारियों से जुड़ा है, जिनकी नौकरी छीन कर उन्हें भारी वित्तीय संकट में डाल दिया गया है।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने इन महामारी के दिनों में पत्रकारों के बेरोजगार होने के कई मामलों में हस्तक्षेप किया है और इस मनमानी कार्रवाई को अमानवीय और परेशान करने वाला बताया है और

मीडिया हाउस मालिकों से स्पष्टीकरण मांगा है ।

अपने पत्र में पीसीआई के सदस्य आनंद राणा ने कहा, जब पत्रकारिता के मूल्यों का हरण हो रहा है, राज्यसभा टीवी के लेखकों ने प्रतिष्ठित पत्रकारिता के मानकों को निर्धारित करने के लिए समर्पण  व ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत की है और RSTV के लिए प्रतिष्ठा हासिल की है, लेकिन दुर्भाग्य से प्रबंधन ने उनको  प्रोत्साहित ना करते हुए मनमाने ढंग से पैंतीस  मीडिया कर्मियों को बर्खास्त कर दिया है।

भारतीय प्रेस परिषद ने राज्यसभा के  उपसभापति
वा उपराष्ट्रपति एमवेकैया नायडू से अनुरोध किया कि वे इस संकट में हस्तक्षेप करें और राज्यसभा टीवी के सभी पत्रकारों के बर्खास्त आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द करें और उन्हें न्याय दें ।

 


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By udaen

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