हमने दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध दिए, आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना जरूरी: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर की रात (भारतीय समयानुसार) न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी का यह संयुक्त राष्ट्र में दूसरा संबोधन है। इससे पहले उन्होंने जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को संबोधित किया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें अधिवेशन की कार्यवाही भारतीय समय के अनुसार शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे शुरू हुई। सबसे पहले मॉरिशस के राष्ट्रपति पिल्लै व्यापूरी ने संबोधित किया फिर अन्य सदस्य देशों के नेताओं के भाषण होने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरे नंबर पर भाषण दिया। इसके बाद नॉर्वे और सिंगापुर के प्रधानमंत्रियों के भाषण होंगे, उसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की बारी आएगी।

मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा का संदेश पूरे विश्व के लिए आज भी प्रासंगिक है।

मोदी के भाषण की मुख्य बातें

– दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने मुझे और मेरी सरकार को वोट दिया। हम बहुत बड़े बहुमत के साथ सत्ता में दोबारा लौटे और इसी जनादेश की वजह से मैं आज यह खड़ा हूं।

– अगले 5 वर्षों में हम जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही 15 करोड़ घरों को पानी की सप्लाई से जोड़ने वाले हैं।

– 2022 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष का पर्व मनाएगा, तब तक हम गरीबों के लिए 2 करोड़ और घरों का निर्माण करने वाले हैं।

– हमारे देश की संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है, जिसकी अपनी जीवंत परंपराएं हैं, जो वैश्विक सपनों को अपने में समेटे हुए है। हमारे संस्कार, हमारी संस्कृति, जीव में शिव देखती है।

– जब एक विकासशील देश, दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम सफलतापूर्वक चलाता है, 50 करोड़ लोगों को हर साल 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देता है, तो उसके साथ बनी संवेदनशील व्यवस्थाएं पूरी दुनिया को एक नया मार्ग दिखाती हैं।

– हमारी प्रेरणा है- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास। हम 130 करोड़ भारतीयों को केंद्र में रखकर प्रयास कर रहे हैं लेकिन ये प्रयास जिन सपनों के लिए हो रहे हैं, वो सारे विश्व के हैं, हर देश के हैं, हर समाज के हैं। प्रयास हमारे हैं, परिणाम सारे संसार के लिए हैं।

– आतंक के नाम पर बटी हुई दुनिया, उन सिद्धांतों को ठेस पहुंचाती है, जिनके आधार पर UN का जन्म हुआ है। इसलिए मानवता की खातिर आतंक के खिलाफ पूरे विश्व का एकमत होना, एकजुट होना मैं अनिवार्य समझता हूं।

– 21वीं सदी की आधुनिक टेक्नोलॉजी, समाज, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सामूहिक परिवर्तन ला रही है। इन परिस्थितियों में एक बिखरी हुई दुनिया किसी के हित में नहीं है। ना ही हम सभी के पास अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर सिमट जाने का विकल्प है।

– सवा सौ साल पहले भारत के महान आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में धर्म संसद के दौरान विश्व को एक संदेश दिया था। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का आज भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यही संदेश है- सौहार्द और शांति।

– 2025 तक हम भारत को तपेदिक (टीबी) से मुक्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हम जन-भागीदारी से जन-कल्याण की दिशा में काम कर रहे हैं और यह केवल भारत ही नहीं ‘‘जग-कल्याण’’ के लिए है।

– ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि प्रति व्यक्ति उत्सर्जन की दृष्टि से देखें तो वैश्विक तापमान को बढ़ाने में भारत का योगदान बहुत ही कम रहा है।

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