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आर्थिक सुस्ती से निपटने और निवेश बढ़ाने के लिए 25 बड़े उद्योगपतियों से बात कर रही सरकार

सरकार ने टाटा, रिलायंस, बिड़ला, महिंद्रा, अदानी, इंफोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के प्रमुखों से परामर्श शुरू कर दिया है।

 

रिलयांस इंडस्ट्रीज के चेयरमेन मुकेश अंबानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फोो

आर्थिक सुस्ती से निपटने और निवेश बढ़ाने के लिए मोदी सरकार देश के 25 बड़े उद्योगपतियों से बात कर रही है। कई क्षेत्रों में सुस्ती की वजह से आलोचनाओं का सामना कर रही सरकार उद्योगपतियों की समस्याओं को जानने की कोशिश कर रही है। सरकार ने टाटा, रिलायंस, बिड़ला, महिंद्रा, अदानी, इंफोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के प्रमुखों से परामर्श शुरू कर दिया है। इन कंपनियों से बात करके उनकी सुस्त पड़ चुकी अर्थव्यवस्था से निपटने और कंपनियों द्वारा व्यापार में आ रही समस्याओं के समाधान पर बातचीत की जा रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक, यह पहल वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सेल (पीएमसी) के तहत शुरू की है। इसके तहत ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी से परामर्श किया जा चुका है। ऑटो सेक्टर में छाई सुस्ती को दूर करने के लिए बातचीत के जरिए कोई हल निकल सकता है। इसके अलावा सरकार ने हिंदुस्तान यूनिलिवर (एचयूएल) से भी बातचीत शुरू कर दी है। मारूति ने कारोबार के लिए फाइनेंस की समस्या का जिक्र किया है जबकि एचयूएल ने प्लास्टिक का मुद्दा उठाते हुए इसके व्यापार पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव के बारे में बताया।

वहीं आने वाले कुछ दिनों में पीयूष गोयल वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल, भारती एयरटेल ग्रुप के सुनील मित्तल, जेएसडब्ल्यू के सज्जन जिंदल, सन फार्मा के दिलीप सांघवी, एचडीएएसी के चेयरमेन दीपक पारेख जैसे बिजनेस लीडर्स से मुलाकात कर परामर्श करेंगे। कंपनी धीरे-धीरे सभी से परामर्श करेगी।

सरकार विनियामक, लाइसेंस, या धन संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए कॉर्पोरेट्स को संबंधित अथॉरिटीज के साथ जोड़ने की कोशिश करेगी। एक अधिकारी के मुताबिक सरकार निवेश में आ रही बाधाओं को पता लगाने की कोशिश कर रही है वहीं कंपनियों से निवेश का प्लान मांगा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि बीते दिनों कॉर्पोरेट्स टैक्स में कटौती के बाद कंपनियां नई मेन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करेंगी।

बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अपने अनुमान में कटौती की है। एजेंसी का कहना है कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की आर्थिक विकास दर 4.9 फीसदी रह सकती है। खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पर मोदी सरकार ने बीते दिनों कुछ बड़े फैसले लिए हैं लेकिन उनका जमीनी स्तर पर उनता प्रभाव अभी तक नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में उद्योगपतियों से परामर्श कर सरकार इस समस्या से निपटने की प्लानिंग में है।

 


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By udaen

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