शहरों में हाउस टैक्स का नियम बदलेगा

शहरों में हाउस टैक्स का नियम बदलेगा

 

नगर निकायों में हाउस टैक्स की दशकों पुरानी प्रणाली अब बदलने जा रही है। शहरी विकास विभाग स्वकर प्रणाली को नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी लागू करने जा रहा है। इसके लिए प्रस्ताव कैबिनेट में लाने की तैयारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले वित्तीय वर्ष तक सभी नगर निकाय स्वकर प्रणाली से जुड़ जाएंगे।

उत्तराखंड के नगर निगमों में हाउस टैक्स भरने के लिए स्वकर प्रणाली लागू है। इसके तहत लोग खुद अपने घरों के कॉरपेट एरिया के अनुसार आकलन कर टैक्स जमा कराते हैं। नगर निकायों का काम सिर्फ इस प्रक्रिया पर नजर रखना है। नगर पालिका और नगर पंचायतों में हाउस टैक्स की पुरानी प्रणाली ही लागू है। इसके तहत नगर निकाय के कर्मचारी घर-घर जाकर, कमरों के अनुसार हाउस टैक्स तय करते हैं। अब शहरी विकास विभाग नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी स्वकर प्रणाली लागू करने जा रहा है। इसके लिए विभागीय स्तर से ऐक्ट में संशोधन का काम पूरा हो चुका है।

नई प्रणाली
सूत्रों के अनुसार, शहरी विकास विभाग का संशोधन प्रस्ताव कैबिनेट में जल्द आ सकता है। इसके बाद इस ऐक्ट को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पास करवाकर अगले वित्तीय वर्ष तक इसे सभी निकायों में लागू किया जाएगा।

खाली प्लॉट पर भी टैक्स घरों की जियो टैगिंग भी
स्वकर प्रणाली के तहत आवासीय, व्यावसायिक निर्माण की दो श्रेणियां हैं, इसके साथ खाली प्लॉट के लिए भी तीसरी श्रेणी बनाई गई है। शहरी विकास विभाग आने वाले समय में हाउस टैक्स कलेक्शन को पूरी तरह से जीआईएस आधारित करने जा रहा है। इसके लिए सभी घरों की
जियो टैगिंग कराई जाएगी।

तैयार किया जा रहा सॉफ्टवेयर 
शहरी विकास विभाग टैक्स भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन करने जा रहा है। इससे लोगों को टैक्स जमा कराने के लिए दफ्तर-दफ्तर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। आम लोगों को ऑनलाइन भुगतान की सहूलियत देने के लिए सभी नगर निकायों के अनुकूल साझा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसका परीक्षण होगा।

फायदा
स्वकर प्रणाली से तीन गुना बढ़ी नगर निगमों की आय

स्वकर प्रणाली से नगर निगमों की आय तीन गुना बढ़ी है। देहरादून नगर निगम में वर्ष 2015-16 तक हाउस टैक्स की पुरानी प्रणाली ही लागू थी, तब इससे कुल कमाई 7.83 करोड़ हुई। 2016-17 में स्वकर प्रणाली लागू होने के बाद दून नगर निगम की कमाई लगातार बढ़ती गई। पिछले वित्तीय वर्ष में कुल कमाई 22.32 करोड़ तक पहुंची। हालांकि, शहरी विकास विभाग का आकलन है कि नगर निगम में अब भी करीब आधे घरों से ही हाउस टैक्स वसूला जा रहा है। अगर टैक्स कलेक्शन शत-प्रतिशत हो जाए तो यह आंकड़ा 50 करोड़ रुपये के पार जा सकता है।

तैयारी
कम्प्लीशन सर्टिफिकेट मिलते ही लगेगा हाउस टैक्स

शहरी विकास विभाग टैक्स प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन करने जा रहा है। इसके तहत विकास प्राधिकरण से निर्माण का कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी होते ही, ऐसे निर्माण पर खुद ही हाउस टैक्स लगना शुरू हो जाएगा। इसके लिए शहरी विकास विभाग ऐसे विकास प्राधिकरणों से टाइअप करेगा। इसके बाद लोगों के लिए अपने निर्माण को छुपाना संभव नहीं होगा।

स्वकर प्रणाली को लेकर सरकार सैद्धांतिक तौर पर सहमत है। इससे सभी नगर निकायों में एकरूपता आएगी। इसके साथ ही नगर निकाय वित्तीय तौर पर भी सक्षम होंगे। नगर निकायों को अपने बोर्ड से इसे पारित कराकर लागू
कराना होगा।
मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री

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