वित्त वर्ष 2019-20 का आम बजट

नई दिल्लीः कल वित्त वर्ष 2019-20 का आम बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया. अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस गांव-गरीब और किसानों पर है. इसी को आधार बनाकर इस बार के बजट में कृषि सेक्टर के लिए बजट बढ़ा दिया गया है.

कृषि का बजटीय आवंटन 78 फीसदी बढ़ा
केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के लिए आवंटन को 78 फीसदी बढ़ाकर 1.39 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. इसमें से 75,000 करोड़ रुपये की राशि सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-किसान योजना के लिए आबंटित की गयी है. सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के संशोधित बजट अनुमान में इसके लिए 77,752 करोड़ रुपये का आवंटन किया था.

आम चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की शुरुआत की गयी थी. इस योजना का लक्ष्य देश के 12.6 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को तीन बराबर किस्तों में कुल 6,000 रुपये देना है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवंटन बढ़ाकर 14,000 करोड़ रुपये हुआ
इसके अलावा सरकार ने चालू वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवंटन को बढ़ाकर 14,000 करोड़ रुपये करने का भी फैसला किया है. वित्त वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमान के मुताबिक इस योजना के लिए 12,975.70 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. करीब 5.61 करोड़ किसानों को इस योजना का फायदा मिल रहा है.

कृषि बजट के तहत किए गए अन्य आवंटन

चालू वित्त वर्ष के बजट में सरकार ने छोटी अवधि के फसल लोन पर ब्याज सहायता के लिए 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. वित्त वर्ष 2018-19 के संशोधित बजट अनुमान में इसके लिए 14,987 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की गयी थी.

कृषि उत्पादों की कीमतों में कमी की स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने के लिए आवंटन को बढ़ाकर 3,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

इसी तरह, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण योजना (पीएम-आशा) के लिए आवंटन को बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है.

हालांकि, कृषि के मशीनीकरण के लिए बजट आवंटन में बहुत अधिक बढ़ोत्तरी नहीं की गयी है. सरकार के इस वित्त वर्ष में इस मद में 600 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के लिए सरकार ने बजट आवंटन को बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 3,500 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है. इससे पहले के वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में यह आंकड़ा 2,954.69 करोड़ रुपया था.

हरित क्रांति के तहत 18 केंद्रीय योजनाओं को लागू करने के लिए बजट आवंटन को बढ़ाकर 12,560 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

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