रसायनिक खेती के प्रदूषण से मुक्त होगी गंगा 2021 तक

रसायनिक खेती के प्रदूषण से मुक्त होगी गंगा 2021 तक


राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 2021 तक गंगा पूरी तरह से रसायनिक खेती के प्रदूषण से मुक्त हो जाएगी। मुजफ्फरनगर से बलिया तक जैविक खेती की मदद से सात सौ कलस्टर गंगा के किनारों  पर होने वाली खेती की तस्वीर बदल देंगे।
केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास से चलने वाली योजना के पहले चरण में 320 कलस्टर में इस योजना को चालू किया गया था। इसके नतीजे बहुत अच्छे नहीं रहे थे। लिहाजा इस बार मंत्रालय ने फूलप्रूफ व्यवस्था की है। 
      
गंगा के किनारे की 14 सौ हेक्टेयर जमीन और 25 जिले परंपरागत और प्रकृतिक तरीके से खेती के मॉडल बनेंगे। इससे गंगा के रिवरबेड पर केमिकल खेती की वजह से नष्ट हो रहे जलआश्रित जीवों को जीवन, औषधिय उपज और पानी को खतरनाक रसायनों से निजात मिलेगी। इसमें 109 ब्लॉक और 959 ग्राम पंचायत शामिल हैं। इस योजना में किसानों को जैविक खेती केलिए प्रशिक्षण, बीज से लेकर रसायनमुक्त खाद तक उपलब्ध करायी जाएगी। 

इस योजना में नमामि गंगे, स्वच्छता और कृषि विकास मंत्रालय भी सहयोग करेंगे। वैसे इस योजना के पहले चरण में 320 जिलों में जैविक खेती की शुरुआत की गई थी। इसके बाद दूसरे चरण में इसकी शतप्रतिशत सफलता को सुनिश्चित करने के लिए हर जिले को जहां योजना है वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए केंद्रीय कृषि विकास मंत्रालय मॉनीटरिंग सेल से जोड़ा गया है। 

इसमें 15 दिन में निगेहबानी कमेटी की बैठक होगी। इसमें वीडियो कांफ्रेंसिंग की मदद से खेती पर हो रहे कामों की प्रगति जांची जाएगी। हर तिमाही सभी हितधारक मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा इस पूरी योजना की फिजिकल मॉनीटरिंग करेगी। इससे लाभांवित होने वाले जिले हैं। मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, हापुड़, बुलंदशहर, बदायूं, मिर्जापुर, कौशांबी, प्रयागराज,हरदोई, बलिया, गाजीपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, भदोही, फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा, कन्नौज, कानपुर, कांसगंज, रायबरेली, भदोही, उन्नाव और  वाराणसी को इसके लिए चुना गया है। इसमें 20 हेक्टेयर का एक कलस्टर बनाया गया है। पूरी योजना पर 70 करोड़ रूपये खर्च किये जाएंगे। इसमें  42 करोड़ केंद्र और 28 करोड़ राज्य सरकार देगी।

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