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यूट्यूबर किसान इस तरह बना रहे हैं खेती को आसान
इकनॉमिक टाइम्स | Updated Jun 16, 2019, 02:35 PM IST
​​अंबाला के एक भैंस पालक भले ही किसी यूट्यूब स्टार की तरह न लगें लेकिन हरविलास सिंह के एक विडियो को यूट्यूब पर 5.1 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। इस विडियो में एक इनोवेटिव ऑटोमैटिक ड्रिंकिंग बोल दिखाया गया है जिससे उनके पशुओं को 24×7 वाटर सप्लाई मिल सके।

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नई दिल्ली
अंबाला के एक भैंस पालक भले ही किसी यूट्यूब स्टार की तरह न लगें लेकिन हरविलास सिंह के एक विडियो को यूट्यूब पर 5.1 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। इस विडियो में एक इनोवेटिव ऑटोमैटिक ड्रिंकिंग बोल दिखाया गया है जिससे उनके पशुओं को 24×7 वाटर सप्लाई मिल सके। इस विडियो को दर्शन सिंह ने शूट किया है जो खुद एक किसान हैं और एक लोकप्रिय यूट्यूब फार्मिंग चैनल चलाते हैं।

छह महीने पहले महाराष्ट्र के सांगली के एक किसान संतोष जाधव ने एक विडियो पोस्ट किया था जिसमें सब्जियों के लिए खासतौर पर बनाए गए बरसाती पाइप के जरिए सिंचाई के तरीके को दिखाया गया था। अभी तक इस विडियो को 5 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और विडियो पर दूसरे किसानों ने इस बारे में ज्यादा जानकारी मांगते हुए 200 से ज्यादा कॉमेंट किए हैं। इन सवालों में शामिल हैं- इसकी लागत कितनी है? क्या यह एक सस्ता विकल्प है? अगर कोई गाय या भैंस पाइप पर पैर रख दे तो यह फटेगा तो नहीं?

यूट्यूब पर खेती से जुड़े विडियो को युवा और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले किसानों ने बनाया है और इन्हें लाखों में व्यूज मिल रहे हैं। इनके सब्सक्राइबर्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ये विडियोज डिजिटल युग के ‘कृषि दर्शन’ बन चुके हैं और खाद व खरपतवार जैसे विषयों पर ज्ञान दे रहे हैं। मोबाइल फोन और कैमरों पर शूट किए गए इनमें से अधिकतर विडियो को बेहतर तरीके से प्रोड्यूस किया गया है और इनका प्रेजेंटेशन व एडिटिंग बढ़िया क्वॉलिटी की है।

संतोष जाधव 26 वर्ष के हैं और उन्होंने 2018 में अपना फार्मिंग चैनल ‘इंडियन फार्मर’ तब शुरू किया, जब उनके दोस्तों ने उनके द्वारा खेती की तकनीक के जटिल तरीके को आसानी से समझाने के तरीके की तारीफ की। जाधव याद करते हुए कहते हैं, ‘मैंने पहला विडियो एक घने गन्ने के खेत में खड़े होकर सैमसंग गैलेक्सी जे7 मैक्स पर शूट किया था।’ अब उनके चैनल के सब्सक्राइबर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और फिलहाल 2 लाख से ज्यादा लोग चैनल सब्सक्राइब कर चुके हैं। अब जाधव ने कैनन DSLR कैमरा खरीद लिया है। विडियो शूट व एडिट करने में एक दोस्त उनकी मदद करता है। जाधव का कहना है कि वह खेती की तकनीक और सरकारी स्कीम्स व सब्सिडी पर ध्यान देने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा कैमरे के सामने वह नैचरल रहते हैं।

जब एमपी के किसान को विडियोज ने पहुंचाया विदेश
पिछले साल जुलाई में किसान नंदकिशोर धाकड़ को पहली बार 10 दिनों के लिए विदेश जाने का मौका मिला, जब उन्हें पपीते की खेती करने वाले एक नाइजीरियाई किसान ने आमंत्रित किया। नाइजीरियाई किसान ने धाकड़ द्वारा अपलोड विडियो को यूट्यूब पर देखा था। धाकड़ मध्य प्रदेश के नीमच जिले में भीमसुख गांव में रहते हैं और उन्होंने ‘five secrets of papaya farming’ अपलोड किया था। धाकड़ ने कहा, ‘उन्होंने मुझे कॉल किया और कहा कि वह जो पपीते उगाते हैं, वे छोटे रह जाते हैं और मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है। मैंने उन्हें दिखाया कि पपीते के पेड़ों को सही मात्रा में पानी देने और खरपतवार को भी नियंत्रित में रखने की जरूरत है। इसके बाद, उन्हें मुझे यह बताया कि अब पपीते बड़े साइज में होने लगे हैं और उनकी फसल बेहतर हो गई है।’ 28 साल के धाकड़ देसी खेती चैनल चलाते हैं जिसके 1.5 लाख सब्सक्राइबर्स हैं।

यूट्यूब पर विडियोज से मधुमक्खी पालन सीखने के बाद, 12वीं पास धाकड़ ने नवंबर 2017 में अपना चैनल लॉन्च किया था। वह कहते हैं, ‘मैंने सोचा कि मुझे भी एक कोशिश करनी चाहिए।’ अपनी विडियोज में वह किसानों को परंपरागत पसलों के बेहतर विकल्प के बारे में जानकारी देते हैं। धाकड़ बताते हैं, ‘उदाहरण के लिए, गर्मी में जब पानी कम रहता है तो किसानी ट्रडिशनल मूंगलफली की जगह तिल्ली उगा सकते हैं। तिल्ली को कम पानी की जरूरत होती है। 1 क्विंटल तिल्ली के लिए 10,000 रुपये जबकि इतनी ही मूंगफली के लिए 4,000 रुपये मिलते हैं।’ वह अपने विडियोज को वनप्लस 5 स्मार्टफोन पर शूट करते हैं और एक फ्री सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर एडिट करते हैं।

भारतीय किसानों के लिए ये विडियोज न केवल बढ़िया जानकारी उपलब्ध कराते हैं बल्कि किसानों की एक कम्युनिटी बनाने में भी मदद कर रहे हैं। जाधव कहते हैं, ‘भारत में लगभग 50 प्रतिशत लोग खेती करते हैं और उनमें से अधिकतर अनपढ़ हैं। इसलिए हमें एक-दूसरे को सिखाना है, पढ़ाना है।’

विडियोज से मशरूम की खेती सिखाना
न केवल मौजूदा किसान ये विडियोज देख रहे हैं, बल्कि जो भविष्य में किसान बनना चाहते हैं वे भी इन विडियो के दर्शक हैं। 25 साल की गीतांजलि साहू छ्त्तीसगढ़ के रायपुर से संबंध रखती हैं और उन्होंने ऑनलाइन ही मशरूम की खेती करना सीखा। अब वह अपने गांव बिरोदा में दूसरी महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही हैं। इकनॉमिक्स में मास्टर्स कर चुकीं साहू ने खेती इसलिए अपनाई क्योंकि उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी। साहू का कहना है, ‘मैं अपने गांव में लोगों से मशरूम की खेती के बारे में पूछती थी, लेकिन किसी को इस बारे में कुछ पता नहीं था।’ इसके बाद साहू ने ‘इंटरनेट साथी’ का रुख किया। यह गूगल और टाटा ट्रस्ट की साझेदारी में चलाया जाने वाला अभियान है जिसमें ग्रामीण महिलाओं को डिजिटली साक्षर किया जाता है। आज वह अपने 20 बेड से 3-4 किलोग्राम मशरूम उगाती हैं और बाजार में इसे 200 रुपये/किलोग्राम की दर से बेचती हैं।

फार्मिंग लीडर यूट्यूब चलाने वाले दर्शन सिंह का कहना है कि उन्हें बहुत सारे कॉल आते हैं और लोग उनसे खाना उगाना सीखने के बारे में पूछते हैं। 27 साल के दर्शन सिंह अब तक 470 विडियो शूट कर चुके हैं और अगले महीने से किसानों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने जा रहे हैं। उनका कहना है, ‘शहरों में नौकरी करने वाले लोग सबसे ज्यादा कॉल करते हैं। लेकिन हम उन्हें खेती की वास्तविकता बताते हैं- कि खेती आसान नहीं है और इसके लिए बहुत ज्यादा धैर्य की जरूरत है।’
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By udaen

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