माता-पिता ही नहीं, सास-ससुर की भी उठानी होगी जिम्मेदारी, बिल लोकसभा में पास

माता-पिता ही नहीं, सास-ससुर की भी उठानी होगी जिम्मेदारी, बिल लोकसभा में पास

 

वरिष्ठ नागरिकों को किसी भी रूप में प्रताड़ित करना अब बेहद महंगा पड़ेगा। प्रताड़ित करने वालों को छह महीने की जेल की सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा बुजुर्गों के भरण पोषण की जिम्मेदारी अब सिर्फ बेटे की नहीं बल्कि बहु और दामाद की भी होगी। बुजुर्गों की हो रही उपेक्षा और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बुधवार को लोकसभा में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण और कल्याण संशोधन बिल पेश किया गया।

60 दिनों में दूर होंगी शिकायतें
बिल के तहत बुजुर्गों की किसी भी शिकायतों का निपटान हर हाल में 60 दिनों के अंदर किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों को प्रताड़ित-अपमानित करने पर छह महीने की सजा तय की गई है। साथ ही बुजुर्गों के भरण पोषण के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। इनके मासिक भरण पोषण की 10 हजार रुपये की ऊपरी सीमा को हटा लिया गया है।

अब बेटे, बहू या दामाद की आय के अनुसार भरण पोषण की राशि तय की जाएगी। हर जिले में बुजुर्गों के लिए विशेष पुलिस यूनिट का गठन होगा। सभी थानों में शीर्ष अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और अलग से हेल्पलाइन नंबर जारी होगा।

बालक की परिभाषा बदली
बिल में बालक की परिभाषा में पुत्रवधु व दामाद को भी शामिल किया है। यानि अब विशेष परिस्थिति में पुत्रवधु और दामाद को सास-ससुर के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठानी होगी।

वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सुरक्षा जरूरी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा, वर्तमान हालात में वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक सुरक्षा की जरूरत है। उन्हें भी गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।

विरोध के बीच सामाजिक सुरक्षा संहिता बिल लोकसभा में पेश
विपक्ष के विरोध के बीच बुधवार को श्रम कल्याण कानूनों को एकबद्ध करने वाला सामाजिक सुरक्षा संहिता बिल लोकसभा में पेश किया गया। बिल के तहत श्रम कल्याण के लिए बने 44 कानून अब जल्द ही 4 तक सिमट जाएंगे। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए श्रमिकों से कल्याण से जुड़े कई प्रावधानों को खत्म करना चाहती है।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिल में श्रमिकों के कल्याण से संबंधित सभी पक्षों को शामिल किया गया है। बिल का विरोध करते हुए आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने कहा, आईएलओ से जुड़ा हुआ है। इसके तहत सदस्य देशों को अपने यहां कर्मचारी कल्याण की व्यवस्था करना अनिवार्य है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी बिल को श्रमिक विरोधी बताया।

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