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मां ने बेटे को ‘किसान’ बनाने के लिए छोड़ी 90,000 की सरकारी नौकरी

 

Gurubaks

गांव खाली हो रहे हैं, क्योंकि लोग शहरों का रुख कर रहे हैं। कोई माता-पिता अपने बच्चे से खेती-बाड़ी नहीं करवाना चाहता। आप भी किसानों की स्थिति से वाकिफ होंगे। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार के पास 2016 के बाद से किसानों की आत्महत्या से जुड़े आंकड़े भी नहीं हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2015 में किसानों की आत्महत्या के मामलों की संख्या 3,097 और 2014 में 1,163 थी। ऐसे में एक कपल ने अपने बेटे को किसान बनाने के लिए शहर छोड़ दिया! कमाल है ना?

इंदौर में खरीदी जमीन

‘द बेटर इंडिया’ के मुताबिक, राजेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चंचल कौर राजस्थान के अजमेर से ताल्लुक रखते हैं। दोनों का एक 11 साल का बेटा है, जिसका नाम गुरुबक्ष सिंह है। 54 वर्षीय राजेंद्र सिंह इंडियन रेलवे में कार्यरत हैं। जबकि उनकी पत्नी सरकारी स्टाफ नर्स हुआ करती थीं। दोनों ने मिलकर इंदौर के पास एक गांव में डेढ़ एकड़ जमीन खरीदी, जहां वो मिलकर अपने बेटे को किसान बनने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

शहर की जिंदगी है दूषित

कपल का मानना है, ‘भले ही हम किसी बड़े शहर में रहकर अच्छा पैसा कमा रहे हों। लेकिन इसके बावजूद भी हम साफ हवा और स्वच्छ पानी के लिए तरसते हैं। इतना ही नहीं, आजकल तो घरों में धूप भी नहीं आती। ऐसे में इतना पैसा कमाने का क्या फायदा? कपल ने इन्‍हीं कारणों से अपने बेटे को एक अलग जिंदगी देने का फैसला किया, जिसके लिए उन्होंने असरावाद बुजुर्ग (इंदौर) में जमीन खरीदी।

कपल ने ली जैविक खेती की ट्रेनिंग

गुरुबक्ष की मां ने साल 2016 में 90 हजार प्रतिमाह की सरकारी नौकरी छोड़ी। रिश्तेदारों और साथियों ने उनके फैसले को गतल बताया। लेकिन वो फैसला कर चुकी थीं कि उन्हें अपने बेटे को एक स्वस्थ और स्वच्छ जीवन देना है। वो साल 2017 में बेटे के साथ इंदौर शिफ्ट हो गईं, जहां कपल ने पद्मश्री डॉ. जनक पलटा से जैविक खेती की ट्रेनिंग ली। साथ ही, सोलर कुकिंग, सोलर ड्राईंग और जीरो-वेस्ट लाइफस्टाइल जीने की कला भी सीखी।

बेटे को भी पंसद है यह लाइफ

कपल को अपने बेटे को लेकर यह चिंता थी कि वो कैसे इस बदलाव से डील करेगा? लेकिन गुरुबक्ष इस जिंदगी से खुश है। वो जैविक खेती से लेकर हर काम में मम्मी का हाथ बंटाता है। गांव में उसके कई दोस्त भी बन गए हैं, जिन्हें वो सोलर कुकिंग या खेती के तरीके सिखाता है। साथ ही, खेल-खेल में उनसे भी सीखता है।

पैसे के चक्कर में भूल जाते हैं बच्चों को

वो कहते हैं, ‘आजकल लोग अपने बच्चों की शिक्षा और रहन-सहन पर लाखों खर्च करते हैं। लेकिन इन पैसों को कमाने की जद्दोजहद में वह उन्हें समय ही नहीं दे पाते। हम हमेशा अपने बेटे से कहते हैं कि वो किसी रेस में नहीं है। उसे किसी से आगे या पीछे नहीं चलना, बस अपनी गति से चलना है।’

अब इस तरह से जी रहे हैं जिंदगी

राजेंद्र और चंचल के घर अब सौर ऊर्जा से ही खाना बनता है। घर के लिए सब्जियां उनके खेत से ही आती हैं, जिन्हें वो जैविक तरीके से उगाते हैं। चंचल सबकुछ अकेले ही संभाल रही हैं। पति नौकरी के कारण इंदौर ज्यादा वक्त नहीं रुक पाते हैं। ऐसे में वो ही गुरुबक्ष की पढ़ाई, खेती की ट्रेनिंग, फार्म का काम, यह सब कुछ अकेले ही संभाल रही हैं।


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By udaen

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