भाकृअनुप-आईवीआरआई द्वारा विकसित डायग्नोस्टिक्स किट का हुआ विमोचन

भाकृअनुप-आईवीआरआई द्वारा विकसित डायग्नोस्टिक्स किट का हुआ विमोचन

 

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) और श्री अतुल चतुर्वेदी, सचिव, पशुपालन विभाग, भारत सरकार ने आज नई दिल्ली के कृषि भवन में दो एलिसा किट जारी किए। पहला एलिसा किट भेड़, बकरी, मवेशी, भैंस और ऊँट में ब्लूटंग (एक वायरल बीमारी जो मच्छरों के काटने से फैलता है) के निदान के लिए और दूसरा सूअरों में जापानी एन्सेफलाइटिस (जापानी दिमागी बुखार) के लिए।

Release of Diagnostics Kits developed by ICAR-IVRI

डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने अपने संबोधन में दोनों किट की मुख्य विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। सूअर के लिए जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एलिसा किट (आईजीएम) के बारे में प्रकाश डालते हुए डॉ. महापात्र ने उल्लेख किया कि जेई देश में हर साल बच्चों की मौत के लिए एक प्रमुख विषाणुजनित पशुजन्य बीमारी है।

भाकृअनुप-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित किट वास्तव में सूअर की आबादी में जेई वायरस के सक्रिय संक्रमण का आकलन करने के लिए वास्तव में उपयोगी है जो मनुष्यों में जेई के प्रकोप की भविष्यवाणी करता है। 52,000 रुपए की कीमत पर बाजार में उपलब्ध वाणिज्यिक किट की तुलना में भाकृअनुप-आईवीआरआई द्वारा विकसित किट किसानों के लिए केवल 5,000 रुपए की न्यूनतम कीमत पर उपलब्ध है। महानिदेशक ने उल्लेख किया कि प्रत्येक किट लगभग 45 नमूनों के परीक्षण के लिए है।

“ब्लूटंग: एंटीजन का पता लगाने के लिए सैंडविच एलिसा” नामक दूसरी किट की विशेषताओं पर बल देते हुए डॉ. महापात्र ने कहा कि ब्लूटंग (बीटी) वायरस घरेलू और जंगली जुगाली करने वालों का एक कीट-संक्रमित वायरल रोग है जिसमें कैमलिड प्रजातियाँ शामिल हैं। यह रोग देश भर में भेड़, बकरी, भैंस और ऊँटों में व्यापक रूप से फैल रहा है।

किट की मदद से ब्लूटंग वायरस को अतिसंवेदनशील जानवरों के टीकाकरण, रोगवाहक नियंत्रण और अच्छे प्रबंधन प्रथाओं के साथ संक्रमित जानवरों के संगरोध के साथ नियंत्रित किया जा सकता है। टीकाकरण के अलावा संक्रमित जानवरों का प्रारंभिक निदान और अलगाव रोग के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए आमतौर पर सुझाए गए निवारक तरीकों में से एक है।

डॉ. महापात्र ने कहा कि किट को वैज्ञानिकों ने उनकी विश्वसनीयता के लिए पहले मान्य किया है। माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किट तैयार किए गए हैं।

श्री अतुल चतुर्वेदी, सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग ने भाकृअनुप और पशुपालन विभाग की संयुक्त पहल की सराहना की। श्री चतुर्वेदी ने कहा कि इन दोनों किटों को लॉन्च करना निश्चित रूप से न केवल कृषक समुदाय बल्कि समग्र समाज के लिए फायदेमंद होगा। हर साल समाज में सबसे घातक बीमारियों के कारण हताहतों की संख्या का उल्लेख करते हुए सचिव ने उल्लेख किया कि किट वास्तविक मददगार साबित होगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह पहल प्रधानमंत्री के किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य को साकार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

श्री सुशील कुमार, अतिरिक्त सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं सचिव (भा.कृ.अनु.प.) ने भाकृअनुप और पशुपालन विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधिकारिक रूप से किटों के लॉन्च से पहले दोनों संगठनों के वैज्ञानिकों द्वारा उचित अनुसंधान कार्य किए गए थे। उल्लेखित वायरस से होने वाली बीमारियों के खिलाफ भी किट का परीक्षण किया गया था।

डॉ. प्रवीण मलिक, आयुक्त, पशुपालन विभाग ने ब्लूटंग वायरस की रोकथाम पर जोर दिया जो बड़े पैमाने पर पशु के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। स्वदेशी रूप से तैयार किट निश्चित रूप से वायरस के कारण होने वाले संक्रमण से प्रभावी रूप से लड़ने में मददगार होगी। किट में वायरस का पता लगाने की जबरदस्त क्षमता होती है।

डॉ. आर. के. सिंह, निदेशक, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने पक्षियों, सूअरों और अन्य जानवरों द्वारा विभिन्न हानिकारक बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्यों को संक्रामक रोगों का खतरा अधिक है। उन्होंने उन मामलों के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की, जिसमें बच्चे छोटे या बड़े लोगों की तुलना में बीमारियों से अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि किट हमारे लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने में सहायक होगा।

डॉ. अशोक कुमार, अतिरिक्त महानिदेशक, पशुपालन, भाकृअनुप के साथ-साथ दोनों संगठनों के अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *