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नई दिल्ली. दिल्ली की रहने वाली दीप्ति की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। वो आज 12 करोड़ रेवेन्यू वाली कंपनी आउटडोर एडवर्टाइजिंग स्टार्टअप Gohoardings.com की फाउंडर हैं। लेकिन एक वक्त वो भी था, जब उन्हें अपनी स्टार्टअप कंपनी शुरु करने में 40 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। जिसके बाद वो एक तरह से ट्रामा में चली गई थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वो इस कर्ज से कैसे बाहर निकालेंगी। इसी के चलते दीप्ति ने खुद को एक कमरे में कैद कर लिया। दीप्ति ने हालात से हार नहीं मानी दरअसल हुआ कुछ यूं कि 2014 में दीप्ति सीए छोड़ चुकी थीं और कुछ नया करने की सोच रहीं थी। उस वक्त उन्हें एक बड़ा इवेंट ऑर्गनाइज करने का मौका मिला, जिसमें बड़ी हस्तियां हिस्सा लेने वाली थीं। दीप्ति ने पार्टनरशिप में इस इवेंट को सफल बनाने की जिम्मेदारी ले ली। लेकिन दीप्ति इवेंट के लिए स्पॉन्सर नहीं जुटा सकीं और इवेंट के टिकट भी ज्यादा नहीं बिके। इस तरह उन्हें 40 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इवेंट का पार्टनर भी दीप्ति को अकेला छोड़कर चला गया। दीप्ति बताती हैं कि ऐसे में उनके पास दो ही रास्ते थे। एक या तो वो भाग जातीं या फिर इस मुश्किल का सामना करतीं। लेकिन दीप्ति ने हालात छोड़कर भागने में समझदारी नहीं समझी।
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बिजनेस में हुआ 40 लाख का घाटा, पिता ने घर बेचकर दिया साथ, बेटी ने 2 साल में खड़ी की 12 करोड़ की कंपनी
50,000 रुपए से शुरू की थी 12 करोड़ की कंपनी को
Money BhaskarApr 12, 2019, 13:19 IST
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बिजनेस में हुआ 40 लाख का घाटा, पिता ने घर बेचकर दिया साथ, बेटी ने 2 साल में खड़ी की 12 करोड़ की कंपनी
नई दिल्ली. दिल्ली की रहने वाली दीप्ति की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। वो आज 12 करोड़ रेवेन्यू वाली कंपनी आउटडोर एडवर्टाइजिंग स्टार्टअप Gohoardings.com की फाउंडर हैं। लेकिन एक वक्त वो भी था, जब उन्हें अपनी स्टार्टअप कंपनी शुरु करने में 40 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। जिसके बाद वो एक तरह से ट्रामा में चली गई थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वो इस कर्ज से कैसे बाहर निकालेंगी। इसी के चलते दीप्ति ने खुद को एक कमरे में कैद कर लिया। दीप्ति ने हालात से हार नहीं मानी दरअसल हुआ कुछ यूं कि 2014 में दीप्ति सीए छोड़ चुकी थीं और कुछ नया करने की सोच रहीं थी। उस वक्त उन्हें एक बड़ा इवेंट ऑर्गनाइज करने का मौका मिला, जिसमें बड़ी हस्तियां हिस्सा लेने वाली थीं। दीप्ति ने पार्टनरशिप में इस इवेंट को सफल बनाने की जिम्मेदारी ले ली। लेकिन दीप्ति इवेंट के लिए स्पॉन्सर नहीं जुटा सकीं और इवेंट के टिकट भी ज्यादा नहीं बिके। इस तरह उन्हें 40 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इवेंट का पार्टनर भी दीप्ति को अकेला छोड़कर चला गया। दीप्ति बताती हैं कि ऐसे में उनके पास दो ही रास्ते थे। एक या तो वो भाग जातीं या फिर इस मुश्किल का सामना करतीं। लेकिन दीप्ति ने हालात छोड़कर भागने में समझदारी नहीं समझी।

पिता का मिला साथ दीप्ति ने हिम्मत करके नुकसान के बारे में अपने पिता से चर्चा की। दीप्ति बताती हैं कि पापा ने उसी दिन घर बेचने की योजना बनाई और काफी कम पैसों में ही घर बेच दिया ताकि इवेंट में हुए नुकसान की भरपाई हो सके। दीप्ति के मुताबिक पापा ने समझाया था कि ये जो पैसे गए हैं इन्हें बेकार मत समझना। ये तुम्हें काफी सीख देकर गए हैं इसे तुम अपने एमबीए की फीस समझ लो और आगे बढ़ो। इसके बाद दीप्ति के अंदर हिम्मत आई और उन्हें लगा कि अब मेरे पास खोने को कुछ नहीं है और मुझे दोबारा कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने ठान लिया था कि अब वापस नहीं लौटना है।
पति के साथ मिलकर शुरू की कंपनी विकास एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते थे। वैसे तो ये अरेंज मैरिज थी, लेकिन साथ में आकर दोनों को लगा कि उनके सपने एक जैसे ही हैं। ऐसे में अपना खुद का बिजनेस शुरु करने के लिए विकास ने नौकरी छोड़ दी और फ्रीलांसिंग के तौर पर कुछ टेक कंपनियों के लिए काम करने लगे। विकास किसी प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे थे, जहां उन्हें किसी क्लाइंट ने कहा कि उन्हें होर्डिंग्स लगवानी हैं। तभी विकास ने सोचा कि क्यों न खुद की एक कंपनी स्थापित की जाए जहां सिर्फ एक क्लिक में लोगों को होर्डिंग्स लगवाने का काम हो जाए। और इस तरह से उन्होंने अपनी कंपनी गोहोर्डिंग्स डॉट कॉम की स्थापना की।नोएडा स्थित इस स्टार्टअप में फिलहाल 20 लोग काम कर रहे हैं। 50 हजार रुपए लगाकर शुरू की थी कंपनी जब दीप्ति और विकास ने अपनी कंपनी शुरू करने की योजना बनाई थी तो दोनों के पास बहुत ज्यादा पैसे नहीं थे और उन्होंने सिर्फ 50-50 हजार रुपये ही लगाए थे। लेकिन उनका आइडिया इतना सही था कि अपनी मेहनत की बदौलत दोनों ने सिर्फ दो साल में 12 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर लिया। दीप्ति बताती हैं कि पहले साल में सिर्फ 2 करोड़ का टर्नओवर था, लेकिन आने वाले साल में उनका टार्गेट 50 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना है।


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By udaen

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