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बांस की खेती ने बनाया करोड़पति – सफलता की कहानी

बांस की खेती – परिचय

बांस  प्रकृति की अदभुत देन है। संख्या तथा विधिता की दृष्टि से किसी उगाये जाने वाले पादप के इतने उपयोग नहीं होते जितने बांस के होते हैं। बांस की मानव जीवन में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

बांस विशाल घासों कुल का पौधा है जिसमें कल्मों भूमिगत राइजोम से उत्पन्न होती है। यह झाड़ीनुमा होता है, जिसकी प्रक्रति वृक्ष की तरह होती है। इस धरती पर यह सबसे तीव्र गति से बढ़ने वाला पौधा है। बांस को काष्ठीय रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

baans ki kheti

ज्यादातर पोरी (इंटरनोड्स) डे साथ हौलो-कल्म तथा कल्म नोड्स पर शाखाएँ होती है। बांस की आनुवांशिक विविधता की सम्पन्नता के सन्दर्भ में भारत विश्व का दूसरा देश है यहाँ 75 वंशक्रमों (जेनेरा) के तहत कुल 136 प्रजातियाँ पाई जाती है। इसकी परिधि में वन क्षेत्र का लगभग 8.96 मिलियन हेक्टेयर आता है जो देश कुल वन क्षेत्र के 12.8% के समतुल्य है। वनीय क्षेत्र में इसे खराब प्रबंधन, कम उत्पादकता तथा अत्याधिक दोहन के कारण नुकसान होता है। यद्यपि हाल के वर्षों में विकास के एक प्रमुख घटक तथा निर्धन ग्रामीणों के जीवन निर्वाह में सुधार  के लिए एक प्रभावशाली तरीके के तौर पर बांस के बारे में जागरूकता में बढ़ोतरी हुई है। इस पेड़ के 1500 से ज्यादा उपयोग दर्ज है (पालना-झुला से लेकर ताबूत तक) तथा इसमें रोजगार तथा आय सृजन और गरीब ग्रामीणों के पोषण में सुधार की व्यापक संभावनाएं मौजूद है।

कहानी राजशेखर पाटिल की 

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By udaen

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