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गर्मी की शुरुआत होते ही देश के कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है । पीने के साफ पानी के साथ ही दैनिक दिनचर्या के लिए पानी की कमी महसूस की जाती है । देश में पिछले कई वर्षों से औसत से अधिक वर्षा होती है लेकिन गर्मी के सीजन में लगभग 30 % जनसँख्या को पीने का साफ़ पानी नहीं मिलता है ।
जल सरंक्षण एवं सवर्धन अभी भी आम भारतीयों से दूर है और इसके चलते कई लोगों को पीने का पानी लाने के लिए भी कई किलोमीटर का फासला तय करना पड़ता है । इन सब के बीच कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में रहने वाले एक वैज्ञानिक ने जल सरंक्षण के लिए राह दिखाई है । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले लगभग 23 वर्षों में उन्होंने पानी का बिल नहीं भरा है । उनके घर में लगे बारिश के पानी के सरंक्षण के सिस्टम के चलते उन्हें बाहर से पानी मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ी ।पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु शहर में बहुत ज्यादा विकास हुआ है जिसके चलते इस शहर में सामान्य से अधिक बारिश होने के बावजूद गर्मी के मौसम में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है । अपनी धरातलीय एवं भौगोलिक स्थिति के कारण बेंगलुरु में जमीन से पानी निकालना भी महंगा साबित होता है ।इसके साथ ही कावेरी नदी भी शहर से 100 से ज्यादा किलोमीटर दूर है तथा जमीन से लगभग 1000 फ़ीट ऊँचा होने के कारण पम्पिंग एवं पाइप लाइन में काफी पैसे खर्च करने पड़ते है । इस शहर में झीलों का नेटवर्क बना हुआ था लेकिन बेतहाशा विकास एवं घटते जंगल एवं झीलों का क्षेत्रफल पानी की समस्या का मुख्य कारण बन चूका है ।शिवकुमार (AR Shivakumar) जो कि कर्नाटक स्टेट कौंसिल ऑफ़ साइंस एंड टेक्नॉलजी (KSCST) में सीनियर साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत है । उनके घर पर अभी कावेरी वाटर पाइपलाइन का कनेक्शन नहीं है और अपने घर की जरूरत के लिए पानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग से पूरी करते है । IISc में नौकरी लगने के बाद उन्होंने 1995 में अपना घर बनवाया ।घर बनवाने के दौरान शिवकुमार ने अपने परिवार के लिए पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए बहुत रिसर्च किया । वो चाहते थे कि पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए अपनी जरूरत पूरी की जाये । इसके लिए सबसे पहले उन्होंने अपने आसपास के घरों एवं अपार्टमेंट्स के वाटर बिल का अध्ययन किया और उससे उन्हें एक परिवार के लिए महीने भर में जरूरत का पानी और बिल का पता चला ।
शिवकुमार का बेंगलुरु स्थित घर 
अपने रिसर्च से उन्होंने पाया कि एक परिवार को प्रतिदिन अपनी जरूरत के लिए 500 लीटर पानी की आवश्यकता होती है । उसके बाद उन्होंने पिछले 100 वर्षों के मानसून एवं बारिश के डाटा का गहन अध्ययन किया और पाया कि अकाल एवं कम बारिश के दौरान भी इतना पानी तो बरसता ही है जिससे इस शहर के सभी रहवासियों के लिए पुरे वर्ष पानी की उपलब्धता हो सके ।शिवकुमार (AR Shivakumar) के सामने केवल एक ही समस्या थी कि बारिश सामान्यतया 60-70 दिन होती है लेकिन पानी की जरूरत पुरे 365 दिन पड़ती है । इसके लिए उन्होंने 45000 कैपेसिटी के कुछ वाटर टैंक बनवाये । मोटर एवं बिजली पर निर्भरता घटाने के लिए उन्होंने घर की छत पर ही यह टैंक बनवाने का काम किया । सभी टैंक्स में शिवकुमार के द्वारा अविष्कृत फ़िल्टर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया जिससे पानी को शुद्ध किया जा सकता है ।टैंक में पानी भरने के बाद उन्होंने पानी को वेस्ट होने से बचाने के लिए घर में ही गार्डन बनवाया और अतिरिक्त पानी को जमीन में रिचार्ज कर दिया । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुछ ही वर्षों में शिवकुमार के घर के आसपास ग्राउंड वाटर लेवल 200 फ़ीट से घटकर 40 फ़ीट रह गया ।
शिवकुमार के द्वारा विकसित फ़िल्टरिंग सिस्टम 
शिवकुमार पानी का इस्तेमाल पेट्रोल एवं डीजल से भी ज्यादा सतर्कता से करते है । पानी के सरंक्षण के साथ ही शिवकुमार ने घर पर इस्तेमाल हो रहे पानी को भी रीसायकल करने के लिए सिस्टम लगा रखा है । उसके लिए उन्होंने सेपरेट टैंक्स बना रखे है जैसे कि वाशिंग मशीन से निकला सारा अपनी एक टैंक में जमा होता है जो टॉयलेट के फ्लश में इस्तेमाल होता है । इसके साथ ही किचन से निकला पानी गार्डन में इस्तेमाल होता है ।इसके साथ ही शिवकुमार ने अपने घर में बहुत सारे परिवर्तन किये है और अपने घर को इको-फ्रेंडली बना रखा है । सोलर वाटर हीटर से निकले गर्म पानी को पुरे दिन गर्म रखने के लिए चावल के भूसे का इस्तेमाल किया है । इसके साथ ही घर पर उपयोग में आने वाली LED लाइट्स भी सोलर पावर से ही जलती है । घर की छत पर बने वाटर टैंक्स और गार्डन के चलते उनका घर प्राकृतिक रूप से ठंडा भी रहता है ।पिछले कुछ वर्षों में शिवकुमार ने अपनी तकनीक से कई रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से युक्त घर एवं बिल्डिंग्स बनवाये है जिनमे सरकारी और गैर सरकारी अपार्टमेंट्स भी शामिल है । इनमे कर्नाटक विधान सभा , हाई कोर्ट और कुछ कॉर्पोरेट ऑफीस जैसे इंटेल एवं अरविन्द मिल्स भी शिवकुमार की तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है ।शिवकुमार पिछले कई वर्षों से आर्किटेक्ट , बिल्डर्स एवं सरकारी अधिकारीयों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग की निशुल्क ट्रेनिंग दे रहे है । इनकी तकनीक का इस्तेमाल भारत के साथ ही कुछ अफ्रीकन एवं यूरोपियन देशों में हो रहा है । प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए कई संस्थाओं के द्वारा शिवकुमार का सम्मान किया गया है ।


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By udaen

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