पौराणिक स्थल कण्वाश्रम को देश के 32 आयकॉनिक स्थलों में शामिल किया – मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत

पौराणिक स्थल कण्वाश्रम को देश के 32 आयकॉनिक स्थलों में शामिल किया – मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत


प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोटद्वार क्षेत्रांतर्गत कण्वाश्रम में आयोजित कण्वाश्रम बसन्तोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि के रूप शिरकत किया। उन्होंने प्रदेश वासियों को बसंत पंचमी की शुभकामनाएं दी। गढवाल मण्डल के जनपद पौड़ी जिले के कोटद्वार के में स्थित कण्वाश्रम आगमन पर नवनियुक्त गढ़वाल आयुक्त डा0 बीवीआरसी पुरूषोत्तम ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।
मेला समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने वन एवं पर्यावरण मंत्री डा0 हरक सिह रावत एवं गणमान्य अतिथि के साथ विधिवत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ही दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने पौराणिक मान्यता तथा भारतवर्ष के महान चक्रवर्ती राजा भरत की तपस्थली पर रोशनी डाली। कहा कि इस स्थान को विश्व मानचित्र पर स्थान दिलाये जाने को लेकर उनकी सरकार ने ठोस पहल की है। कहा कि प्राचीन, पौराणिक और आधुनिक संस्कृति के बीच में कोई गैप न आ जाए इसके लिए प्रधानमंत्री जी ने ऐसे पौराणिक स्थलों के पुनरूद्धार का बीड़ा उठाया है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने पौराणिक स्थल कण्वाश्रम को देश के 32 आयकॉनिक स्थलों में शामिल किया। जिससे इस क्षेत्र को देश के अन्य प्रसिद्ध स्थलों में शुमार किया जा सके। कहा कि यह प्रधानमंत्री की दूरदष्टी का ही नतीजा है। इसके लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री का आभार भी जताया।
अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं सरकार की कुछ बातें जनता के सामने बताना चाहता हॅू, ताकि हर व्यक्ति सरकार की योंजनाओं को समझकर उनका लाभ भी उठा सके। उन्होंने भारत सरकार की आयुष्मान योजना तथा अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि योजना के तहत प्रदेश के शत प्रतिशत बीपीएल परिवारों को पांच लाख रूपये का हेल्थ कवरेज मिला है। उत्तराख्ांड देश का अकेला ऐसा राज्य बन गया है जिसने इतनी बड़ी हैल्थ योजना को धरातल पर उतारा है। इस योजना के तहत 13 सौ से अधिक बीमारियों का उपचार निशुल्क है। उन्होंने कहा कि योजना को लेकर लोगों में कुछ भ्रांतियां भी हैं। कहा कि योजना के तहत इस बात की भी जानकारी आवश्यक है कि किस बीमारी के लिए कौन सा अस्पताल चिहिन्त है। हर अस्पताल को अलग-अलग बीमारियांं के लिहाज से ही चयनित किया गया है। इसके अलावा उन्होंने कृषि के क्षेत्र में सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बारे में भी विस्तार से जानकारियां दी। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने किसानों की भूमिका को सर्वापरि बताया। कहा कि किसानों को मात्र दो प्रतिशत की ब्याजदर पर कृषि ऋण मुहैया कराये जा रहे हैं। इसके परिणाम बेहतर आये तो इस योजना को भविष्य में भी चालू रखा जाएगा। आज पूरे राज्य के लगभग नौ लाख किसानों के सापेक्ष तीन लाख से अधिक किसानों ने इस योजना का लाभ उठाया है। इसका असर लोगों की आय वृद्धि पर दिख रहा है। इसके अलावा महिल एवं पुरूष समूहों को भी पांच लाख रूपये का ऋण मुहैया कराया जा रहा है। जिससे महिलाओं की आर्थिकी भी बेहतर हो सके।
उन्होंने कहा कि आगामी 14 फरवरी को देश के प्रधानमंत्री रूद्रपुर से तीन हजार चार सौ करोड़ की योजना लॉच करने वाले हैं। इसमें कृषि और कॉपरेटिव पर आधारित कार्य किये जा सकेते हैं। इससे लाखों लोगों को रोगार प्राप्त होंगे। इसके अलावा ऑरगेनिक योजना के तहत प्रधानमंत्री ने प्रदेश के 15 सौ करोड़ रूपये दिये हैं। इन येजनाओं से लोगों का लिविंग स्टैंडर्ड भी बढ़ेगा। उन्होंने होमस्टे योजना को भी राज्यहित में अहम बताया। कहा कि व्यवसायिक होमस्टे में पहले बिजली और पानी का बिल की दरों को कॉमशियल रेट पर लगाया जाता था। लेकिन शीघ्र ही इस डोमेस्टिक दरों पर वहन किया जाएगा। इस प्रकार की योजनाओं से राज्य की बेरोजगारी को तो दूर किया ही जा सकता है बल्कि इससे राज्य की आर्थिकी भी सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री ने पिरूल के व्यवसायिक इस्तेमाल की भी जानकारियां दी। कहा कि चीड़ की पत्तियों, छाल और उसके रेजिन से 143 प्रकार की वस्तुएं बनायी जा सकती हैं। लेकिन उसके लिए बड़े स्तर पर प्लांट व सही तकनीकी जानकारी भी आवश्यक है। कहा कि राज्य में इससे तारपिन, बायो डिजल, लीसा आदि के निर्माण को बढ़ावा दिये जाने की रणनीति बनायी जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिरूल से उच्च गुणवत्ता का कागत भी तैयार किया जा सकता है। इसके लिए राज्य के विशेषज्ञों को इंडोनेशिया भेजा जा रहा है। ताकि प्रदेश में इसका व्यवसायिक प्लांट स्थापित कर इसका वृहद उत्पादन किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने उत्तराख्ांड राज्य को कई प्राकृतिक उपहार दिये हैं। जरूरत उनके वैज्ञानिक दोहन किये जाने की है। कहा कि पिरूल से करीब पचास लाख लोगों को रोजगार भी दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषाओं के रखरखाव और उनको बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। कहा कि विश्वस्तर के भाषाविदों के अनुसार हर घंटे एक भाषा मर रही है। जो कि चिंता का विषय है।
इस मौके पर गढ़वाल आयुक्त डा0 बीवीआरसी पुरूषोत्तम, एसएसपी दलीप सिंह कुंवर, कोटद्वार मेयर हेमलता नेगी, जिलाध्यक्ष भाजपा शैलेंद्र बिष्ट, अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला समेत भाजपा के पदाधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं आमजमानस उपस्थित रहे।

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