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जिला प्रशासन एवं जिला पर्यटन विकास विभाग की तत्वाधान में पांच दिवसीय (15 जनवरी से 19 जनवरी 2020) बर्ड वाचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का खिर्सू में अपर जिलाधिकारी डा0 एस के बरनवाल के अध्यक्षता में विधिवत समापन किया गया। जिसमें कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिया गया। प्रशिक्षण के अन्तिम दिवस को प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षक को पाये गये पक्षी के बारे में पहचान करते हुए संपूर्ण जानकारी दी। उनमें पंछी एवं प्रकृतिक पादप के प्रति प्रेम व उत्साह देखने को मिला।
अपर जिलाधिकारी डा0 एस के बरनवाल ने आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह की रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किये जायेगें। कहा कि पर्यटन को दृष्टिगत रखते हुए यह प्रशिक्षण स्वरोजगार के लिए मील का पत्थर के समान साबित होगा। पहाडों में आने वाले पर्यटकों में प्र्राकृतिक के प्रति प्रेम देखने को मिलते है। यहां के भौगोलिक क्षेत्र में पाये जाने वाले पक्षी उनके उत्सुकता को शांत करने में कारगर होगा। जिससे यहां के युवाओं को एक गाईड के रूप में कार्य मिल सकेंगे।
साहसिक खेल अधिकारी के.एस. नेगी ने कहा कि जिलाधिकारी श्री धीराज सिह गर्ब्याल, पहाडों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए संवेदनशील रहते है। जिसको लेकर उन्होने जनपद के लोगों को अपने ही क्षेत्रों में स्वरोजगार को विकसित करने के लिए अनेक अभिनव कार्य का शुभारंभ किया। उनके ही निर्देशन में जिला पर्यटन विकास विभाग की ओर से संचालित बर्ड वाचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम यहां की युवाओं/निवासियों को स्वरोजार के साथ आर्थिक रूप से सम्मपन बनायेगा।
प्रशिक्षक/बर्ड वाचिंग विशेषज्ञ श्री अजय शर्मा ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से यहां के युवा प्राकृतिक प्रेमी होने के साथ साथ प्राकृतिक के बारे में जिज्ञासा से संपन होगें। अपने भौगोलिक क्षेत्र में विचरण करने वाले परिदों के प्रति जानकारी का संकलन होगें। जिसकें सहयोग से यहां आने वाले पर्यटकों में दुलर्भ पक्षी देखने की जिज्ञासा को आसानी से हल कर अच्छी आमदनी कमा सकते है। कहा कि बर्ड वाचिंग के लिए बच्चों से लेकर वृ़द्ध हर आयु वर्ग के पर्यटक आते है। यहां की दूलर्भ पक्षी इनको स्वत ही खींचा लायेगा। उन्होने सभी प्रशिक्षणार्थियों को बताये गये पछियों के बारे में तथा पाये जाने वाले और पक्षी के बेहतर डाटा रखने को कहा। उन्हाने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम मंे 50 से अधिक पक्षी पाये गये। जिनमें अनेकों दुलर्भ पक्षी भी शामिल है। जिनमें व्हाइट कालर ब्लेक बर्ड, ग्रोविन ब्लेक, हिमालियन ब्लूटेन, यूरोपियन जे, हिमलियन वुड मेकर, गोल्डन बुस रावीन, व्हाइट सोर्टफ लाफिंग ट्रस आदि दुलर्भ पक्षी सहित बुलबुल के पांच प्रजाति, गौरंया के 2 प्रजाति पाये गये है। कहा गौरंया यहां बडी संख्या में देखने को मिल रही है। जो अमुमन शहरों से विलुप्त हो रही है। उन्होने कहा कि खिर्सू के क्षेत्र परिदों की संसार में अच्छी धरोहर है, जहां विभिन्न प्रकार के पंछी विद्यमान है।
इस अवसर पर प्रशिक्षक अश्वनी त्यागी, मेजर केतन, राजीव बिष्ट, के.एस. असवाल, प्रमोद रावत सहित संबंधित अधिकारी एवं प्रशिक्षु कंचन पटवाल, नैन्शी रावत, सिमरन पटवाल, निशा, शालिनी, अलका, भावना, साक्षी, शिवानी, विवेक, अरूण, पवन सहित अन्य छात्र-छात्राऐं मौजूद थे।


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By udaen

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