पलायन रोकने के लिए हर विभाग का होगा एक्शन प्लान

खास बातें

  • प्रदेश सरकार की मुहिम में अब नीति आयोग भी बना साझीदार
  • राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की कोशिश काम आई, 19 को नीति आयोग की टीम आएगी उत्तराखंड 
पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए अब हर विभाग का अपना एक्शन प्लान होगा। विभागों को यह पता रहेेगा कि पलायन रोकने के लिए उन्हें क्या करना है। प्रदेश सरकार के स्तर पर हो रही इस कोशिश में नीति आयोग भी शामिल हो गया है। आयोग प्रदेश के अधिकारियों को बताएगा कि अन्य राज्यों की श्रेष्ठ योजनाएं क्या रहीं हैं और इन योजनाओं को उत्तराखंड में किस तरह से लागू किया जा सकता है।

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पलायन को रोकने के लिए अभी तक प्रदेश में ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की जा सकी है। इस कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार की मदद के लिए नीति आयोग सामने आया है। आयोग से मदद के लिए प्रदेश सरकार के स्तर से भी लंबे समय से कोशिश की जा रही थी। मसूरी में आयोजित कन्क्लेव में भी प्रदेश सरकार ने यह मुद्दा उठाया था। सूत्रों के मुताबिक इसमें राज्यसभा संसद अनिल बलूनी ने भी खासी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बलूनी कुछ समय पहले ही नीति आयोग के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से मिले थे। उन्होंने आयोग से पलायन की रोकथाम के लिए प्रदेश सरकार की मदद करने का आग्रह किया था।

19 दिसंबर को राज्य मेें आएगी नीति आयोग की टीम

पलायन की रोकथाम के लिए विभागों की कोशिश को समझने और अपने अध्ययन को सामने रखने के लिए नीति आयोग की टीम 19 दिसंबर को सचिवालय में होगी। नियोजन विभाग ने इस बैठक में सभी विभागों को शामिल होने को कहा है। विभागों के स्तर से इस कार्यशाला में पलायन रोकने के लिए विभागीय स्तर पर जारी योजनाओं आदि की जानकारी प्रस्तुतिकरण के माध्यम से दी जाएगी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार भी इस कार्यशाला की तैयारी के लिए विभागों से बात कर चुके हैं।

क्या-क्या करना होगा विभागों को

अभी तक जो स्वरूप उभर कर आया है उसके तहत विभागों को अपने स्तर पर एक्शन प्लान तैयार करना होगा। यह एक्शन प्लान बताएगा कि संबंधित विभाग पलायन की रोक थाम के लिए समयबद्ध काम किस तरह से करेंगे। बैठक के बाद यह कार्ययोजना बनेगी और इसमें नीति आयोग भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल होगा।

पलायन के लिए रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा सभी जिम्मेदार 

पलायन आयोग अभी तक प्रदेश में पलायन पर दो रिपोर्ट प्रकाशित कर चुका है। इसमें रोजगार की कमी से करीब 50 प्रतिशत, शिक्षा सुविधाओं की कमी से 15.12 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से 8.83 प्रतिशत, वन्य जीवों से नुकसान की वजह से 5.61 प्रतिशत, उत्पादकता की कमी से 5.54 प्रतिशत और अवस्थापना सुविधा की कमी से 3.37 प्रतिशत पलायन पाया गया।

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