न्याय योजना व्यवहार्य, फंडिंग के लिए टैक्स बढ़ाने की जरूरत नहीं : सैम पित्रोदा

सैम पित्रोदा ने कहा है कि कांग्रेस की न्यूनतम योजना पूरी तरह व्यवहार्य है और इसके लिए देश में टैक्स में बढ़ोतरी की कोई जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि काफी सारे अर्थशास्त्रियों ने इस योजना को लेकर काम किया है। यह लागू की जा सकने वाली योजना है।

sam-pitrodaनई दिल्ली
कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना (NYAY) को लेकर इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदाने कहा है कि उन्होंने कभी भी यह नहीं कहा कि इस योजना की फंडिंग के लिए टैक्स को बढ़ाना पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने हमारे सहयोगी ईटी नाऊ के साथ साक्षात्कार में यह बात कही। पित्रोदा ने कहा, ‘दो करोड़ लोगों को सालाना 72,000 रुपये मिलेंगे। मैंने यह कभी नहीं कहा कि इसके लिए टैक्स में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। मेरी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि पी. चिदंबर ने यह बात सार्वजनिक रूप से कही है। राहुल गांधी भी यह बात सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं। काफी सारे अर्थशास्त्रियों ने इस योजना को लेकर काम किया है। यह लागू की जा सकने वाली योजना है। इसके लिए टैक्स में बढ़ोतरी की कोई जरूरत नहीं होगी।’ कहां से आएंगे पैसे?
सैम पित्रोदा ने कहा, ‘नरेगा के लिए पैसे कहां से आए थे? जैसे ही आप अपनी अर्थव्यवस्था का विस्तार करते हैं, तो आप 10 फीसदी बढ़ जाते हैं। इससे टैक्स बेस बढ़ेगा। अर्थव्यवस्था से अधिक से अधिक लोग शामिल होंगे। नरेगा लागू करते वक्त भी कुछ इसी तरह के सवाल उठाए गए थे। अगर हम नरेगा लागू कर सकते हैं तो इस योजना को क्यों नहीं लागू कर सकते हैं?’
कैसे होगा रोजगारों का सृजन?
उन्होंने कहा, ‘आप ऐसा क्यों कहते हैं? हमें रोजगारों के सृजन के लिए जाना जाता है। हम अतीत में लाखों रोजगारों का सृजन कर चुके हैं। इस सरकार को पता नहीं है कि रोजगारों का सृजन कैसे किया जाता है। यह कोई बिना सोचे-समझे लाई गई योजना नहीं है। यह न तो कोई तिकड़म है और न ही कोई ऐसा जुमला। हम विश्लेषण के बाद ही रोजगार के ऊपर बात करते हैं।’

विपक्ष के डेटा हेरफेर के आरोप पर क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय और जब हम वर्ल्ड बैंक और संयुक्त राष्ट्र के लोगों से बातें करते हैं तो सबका यही कहना होता है कि हम भारतीय आंकड़ों पर भरोसा नहीं करते। हाल में, जीडीपी के आंकड़ों का दोबारा पुनर्मूल्यांकन किया गया। मुझे वास्तव में तथ्य के बारे में जानकारी नहीं है। मैं अभी भी अपनी स्टैटिस्टिक्स पर भरोसा करता हूं। हमारे पास जमीनी स्तर पर अच्छे लोग हैं, जो डेटा को संग्रह करने का काम करते हैं।’

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