नई शिक्षा नीति के मसौदे पर केन्द्र ने राज्यों के साथ की चर्चा

Blog single photo मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में शनिवार को यहां विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की विशेष बैठक में नई शिक्षा नीति के मसौदे पर विचार विर्मश हुआ। बैठक में दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 26 शिक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया। अधिकांश शिक्षा मंत्रियों एवं अन्य प्रतिनिधियों ने नई शिक्षा नीति की प्रशंसा की।

निशंक ने इस मौके पर उच्च शिक्षा में अखिल भारतीय सर्वेक्षण की वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट का विमोचन किया। इसके अलावा मंत्रालय द्वारा शोध का स्तर बढ़ाने एवं शोध कार्य में प्लेगिरिज्म को रोकने के लिए तैयार किए गए साहित्यिक चोरी निरोधी सॉफ्टवेयर (पीडीएस) “शोधशुद्धि” को भी लॉन्च किया।

इस मौके पर निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति प्रधानमंत्री के नए भारत के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने के लिए उल्‍लेखनीय पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए युवाओं की आकांक्षा को पूरा करना और देश को एक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। इस लिहाज से 1992 में संशोधित 1986 की राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में उपयुक्‍त बदलाव करने की जरूरत है ताकि हमारी बड़ी युवा आबादी की समकालीन और भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसलिए इस नीति को तीन दशक से अधिक समय के बाद लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैब की यह विशेष बैठक नई शिक्षा नीति के मसौदे पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई ताकि केन्‍द्र एवं राज्‍य दोनों सरकारों में सहकारी संघवाद की भावना बरकरार रहे और वे एक मजबूत नीति लाने के लिए स्वस्थ एवं समृद्ध बातचीत में संलग्न हों ताकी हमारे युवाओं को 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए सशक्‍त बनाया जा सके।

साहित्यिक चोरी निरोधी सॉफ्टवेयर (पीडीएस) “शोधशुद्धि”  की सेवा यूजीसी के एक इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर (आईयूसी) आईएनएफएलआईबीएनईटी द्वारा लागू की जा रही है। पीडीएस शोधार्थियों के मूल विचारों एवं लेखों की मौलिकता सुनिश्चित करते हुए अनुसंधान परिणाम की गुणवत्ता में सुधार लाने में काफी मदद करेगा।

उच्च शिक्षा में अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) 2018-19  जारी रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा में जीईआर 2017-18 में 25.8 से बढ़कर 2018-19 में 26.3 हो गया, जबकि निरपेक्ष रूप से नामांकन 3.66 करोड़ से बढ़कर 3.74 करोड़ छात्रों का हो गया। एससी के लिए जीईआर में 21.8 से 23.0 और एसटी के लिए 15.9 से 17.2 तक की वृद्धि दर्ज की गई है। जहां तक विश्वविद्यालयों की संख्या में वृद्धि का सवाल है तो इस दौरान वह 903 (2017-18) से बढ़कर 993 (2018-19) और कुल एचईआई 49,964 से बढ़कर 51,649 हो गए हैं। संकाय की संख्या 13.88 लाख से बढ़कर 14.16 लाख हो गई।

बैठक में केंद्रीय संस्कृति मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद सिंह पटेल, खेल एवं युवा मामले के मंत्री किरेन रिजिजू, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे, राज्यों के शिक्षा मंत्री, राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, कैब के सदस्य, स्वायत्त संगठनों के प्रमुख, विश्वविद्यालयों के कुलपति और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव आर. सुब्रह्मण्यम और स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव रीना रे केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उपस्थित रहे।

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