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**तीन पर्यावरण प्रेमियों ने धरती को दुल्हन की तरह खिला दिया*

बहादुरगढ़, पर्यावरण प्रेमियों ने ऐसा कमाल दिखाया की चारो ओर हरियाली खिल उठी। कभी बंजर और खाली पड़ी सरकारी जमीन पर आज हरियाली लहरा रही है। खास बात यह कि इनके द्वारा लगाए गए 20 हजार पेड़-पौधों में विलुप्त हो रही प्रजातियों के भी अनेक पेड़-पौधे हैं।

बहादुरगढ़ के हरियाणा के सरकारी अस्पताल के पीछे पड़ी खाली जमीन अब एक हरे-भरे बगीचे में तब्दील हो चुकी है। एक डॉक्टर, एक बुजुर्ग और एक युवा स्वास्थ्य कर्मी ने अपने काम करते हुए पौधरोपड़ कर सरकारी अस्पताल परिसर को हरियाली से पाट दिया है। जिन वनस्पतियों को हम खो चले हैं, यह तीनों उन्हें न केवल संजो रहै है बल्कि घर-घर पहुंचा भी रहै है। इनके इस प्रयास से महज चार साल में ही 20 हजार से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं। रोजाना नए-नए पौधों को जुटाना और नई पौधे तैयार करना इनकी जिंदगी का हिस्सा है।

कुछ साल पहले तक बहादुरगढ़ के सरकारी अस्पताल के पीछे का हिस्सा खाली था। यहां तबादला होकर आए डॉ. मुकेश इंदौरा ने इस ओर ध्यान दिया तो स्थिति बदल गई। उन्हें 76 वर्षीय बुजुर्ग ओमप्रकाश किंकाण का साथ मिला। दोनों ने तय किया खाली जमीन को हरियाली से भर देंगे। दोनों ने पेड़-पौधे की उन प्रजातियों को जुटाना शुरू किया जो हर तरह से औषधीय हैं और विलुप्त हो चली हैं। इस काम में इनको तीसरा साथी मिला अस्पताल का ही चतुर्थ श्रेणी कर्मी बजरंगी। फिर तो तीनों के मकसद को पंख लग गए और नतीजा सबके सामने है।

हर किसी को लुभाती है हरियाली

इन्होंने अपने विशाल बगीचे में 100 से भी ज्यादा पेड़-पौधों की प्रजातियां संजो रखी हैं। इनके अलावा पांच तरह की तुलसी, बेलपत्र, लैमनग्रास, काला बांसा, जलजमनी, स्तावर, बोगनबेलिया, हरड़, बहेड़ा, अंजीर, आंवला के अलावा हर तरह की परंपरागत और उपयोगी वनस्पति की प्रजाति यहां मौजूद है। इन्होंने यहां नर्सरी भी विकसित की है, जिसमें हर साल हजारों पौधे तैयार होते हैं। अब तो इनका कारवां भी बड़ा होने लगा है। शहर के लोग इनकी मुहिम से जुड़ रहे हैं, जिन्हें ये अपनी नर्सरी से पौधे भेंट करते हैं।

डॉ. मुकेश इंदौरा कहते हैं, औषधीय पौधों और वनस्पति को बचाना जरूरी है। यदि हम पेड़-पौधों से जुड़े रहेंगे, तो स्वास्थ्य खुद ही ठीक रहेगा।


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By udaen

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