चारधाम सड़क प्रोजेक्ट में दिखाई जल्दबाजी ,सुप्रीम कोर्ट की समिति का आकलन

सुप्रीम कोर्टचारधाम सड़क को लेकर पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता में बनी सर्वोच्च न्यायालय की उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने यह पाया है कि सड़क निर्माण से निकले मलबे के वैज्ञानिक रूप से प्रबंधन की अभी दरकार है। 24 अक्टूबर तक चारधाम सड़क के विस्तृत निरीक्षण में समिति ने यह भी महसूस किया कि इस तरह की बड़ी परियोजना के निर्माण में जल्दबाजी से काम लिया गया।

नवंबर में रिपोर्ट सौंप देगी समिति

सुप्रीम कोर्ट की यह समिति नवंबर माह में ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को सौंप देगी। समिति के अध्यक्ष रवि चोपड़ा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि समिति के प्रत्येक सदस्य से पहले रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसके बाद मंत्रालय से इस पर जवाब मांगा जाएगा और इसके बाद ही रिपोर्ट तैयार होगी। समिति के अध्यक्ष रवि चोपड़ा के मुताबिक 22 और 23 नवंबर को बैठक भी बुलाई गई है।

चार सप्ताह का अतिरिक्त समय भी मांग सकती है समिति
इतना जरूर है कि विस्तृत रिपोर्ट के लिए समिति को करीब चार सप्ताह के अतिरिक्त समय की दरकार होगी। चारधाम सड़क का स्थलीय निरीक्षण पूरा कर चुकी समिति को आठ दिसंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का वक्त सुप्रीम कोर्ट ने दिया है।

शहरी क्षेत्रों को लेकर समस्या
समिति को चारधाम सड़क के दायरे में आने वाले शहरों को लेकर भी समस्या का सामना करना पड़ा है। समिति ने पाया कि शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण की जद में आने वाले लोग मकानों, दुकानों के ध्वस्त होने के डर से परेशान हैं। मुसीबत यह है कि बाईपास का भी लोग काम धंधा चौपट होने की डर से विरोध कर रहे हैं।

चारधाम सड़क मार्ग के निर्माण में समिति ने पाया कि करीब-करीब सभी जगह मलबे की डंपिंग के लिए डंपिंग जोन बनाए गए हैं। इन डंपिंग जोन में सुरक्षा दीवार भी बनाई गई हैं। यह भी सामने आया कि कई क्षेत्रों में दीवार बहुत कमजोर थी या उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। खास बात यह भी है कि निर्माण कार्य से निकले मलबे को डंप करने के बाद उसके वैज्ञानिक रूप से उपचार करने की न के बराबर व्यवस्था की गई।

इतना जरूर है कि अन्य सड़क निर्माण मामलों की तरह इस सड़क के निर्माण से निकले मलबे को सीधे नदी में नहीं डाला जा रहा है। समिति ने यह भी पाया कि ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच सड़क चौड़ी की गई और ट्रक, डंपर आदि के लिए पार्किंग जोन भी बनाए गए। यह स्पष्ट नहीं है कि निर्माण के बाद इन पार्किंग जोन का क्या होगा? समिति अपनी तरफ से यह भी सुझाव दे सकती है कि चारधाम यात्रा के दौरान इस तरह के क्षेत्रों का उपयोग यातायात प्रबंधन के लिए किया जाए। समिति ने यह महसूस किया है कि सड़क निर्माण की इस परियोजना में जल्दबाजी की गई, जिससे कई जरूरी पहलुओं को पूरी तवज्जो नहीं मिल पाई।

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