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नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि क्षेत्र में छोटे व मझोले किसानों की प्राथमिकताओं के हिसाब से शोध व अनुसंधान की वकालत की है। उन्होंने कहा कि सुदूर ग्रामीण किसानों की जरूरतें उनके आसपास ही पूरी होनी चाहिए, ताकि शहरों पर उनकी निर्भरता खत्म हो। तोमर सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के बारे में जानकारी ले रहे थे।

इस दौरान आइसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने परिषद के कामकाज व दायरे का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। तोमर ने कहा कि खेती जैसे उद्यम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए आधुनिक अनुसंधान पर जोर देना होगा। छोटे किसानों की जरूरतों के हिसाब से अनुसंधान होने चाहिए। कृषि मंत्री ने पहले दिन ही कृषि वैज्ञानिकों से अपने कामकाज की हर दूसरे महीने समीक्षा करने की नसीहत दी।

उन्होंने कहा कि खेती की जरूरतों के हिसाब से वैज्ञानिक अनुसंधान करें, तभी फायदेमंद होगा। क्षेत्रीय जरूरतों का पूरा ध्यान रखकर ही शोध करना चाहिए। मंत्री ने कहा कि शहरों के आसपास जमीन बहुत महंगी होने से खेती के बदले उनका उपयोग व्यावसायिक होने लगा है। इससे वहां के किसानों की आमदनी भले ही बढ़ गई हो, लेकिन शहरी आबादी को ताजा कृषि उत्पाद मुश्किल से मिल पाता है।

छोटे किसानों की चिंता करते हुए तोमर ने कहा कि वैज्ञानिकों को उनके लिए तकनीक बनाने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि छोटे किसान अब तक नजरअंदाज होते रहे हैं। घटते जल संसाधन के प्रभावशाली संरक्षण और प्रबंधन तथा इसे सर्वसुलभ बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी की जरूरत है। महापात्र ने देश में खाद्यान्न, बागवानी, पशुधन, डेयरी उत्पाद, पोल्ट्री व मत्स्य की मांग व आपूर्ति का ब्योरा पेश किया। उन्होंने कहा कि उत्पादकता के साथ जैव व खाद्य गुणवत्ता विशेष पर जोर दिया गया है। खेती में गन्ना की सीओ-238 प्रजाति, पूसा बासमती 1121 किस्म और अनार की भगवा किस्म का उल्लेख करते हुए बताया कि इन प्रजातियों ने किसानों की आमदनी में कई गुना की वृद्धि कर दी है।


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By udaen

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