किसान कल्याण योजना : गांवों की मिट्टी की सेहत का हाल बतायेगा डिजिटल नक्शा

किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही केंद्र सरकार उनके लिए अन्य कई कल्याणकारी योजनाओं को लेकर युद्धस्तर पर काम कर रही है. केंद्र सरकार की रणनीति के तहत इन्हीं कल्याणकारी योजनाओं में से एक किसान कल्याण योजना है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के गांवों की मिट्टी की सेहत का पता लगाना है, मगर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आपके खेत की मिट्टी की जांच होने के बाद रिपोर्ट लाने के लिए किसी लेबोरेटरी या विभाग में नहीं जाना पड़ेगा. जी हां, आपके गांव के मुख्य चौराहे पर सरकार की ओर से लगाया जाने वाला डिजिटल मैप (डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड) ही मिट्टी की सेहत का हाल बता देगा. जांच के लिए लायी गयी मिट्टी के सैंपल्स. सरकार की इस योजना के तहत कई चरणों में गांवों की मिट्टी की सेहत की जांच चल रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि किस गांव की किस मिट्टी की उत्पादन क्षमता कितनी है, कौन-सी फसल लगाने से किसानों को ज्यादा उपज मिलेगी, मिट्टी की गुणवत्ता कैसी है, उसे किस प्रकार के उपचार की जरूरत है, वहां का वातावरण कैसा है, पारिस्थितिकी तंत्र कैसा है. मृदा और जल संरक्षण की क्या स्थिति है. जमीन के इस्तेमाल के साथ-साथ पर्यावरण की गुणवत्ता और जलछाजन का भी पता लगाया जा रहा है. इन सबको सम्मिलित कर एक डिजिटल नक्शा बन रहा है और उसे हर गांव में लगाया जायेगा. गांवों में लगा यह डिजिटल नक्शा एक नजर में मिट्टी की सेहत का हाल बता देगा. बतायेगा कि खेत में कटाव हो रहा है या नहीं. वहां सिंचाई की व्यवस्था है या नहीं. खेत की उपज बढ़ाने वाले किस तत्व की जरूरत है. खाता और खेसरा संख्या के साथ पूरा विवरण डिजिटल मैप में होगा. योजना के मुताबिक, नक्शे में जो विस्तृत विरण होंगे, उसमें मिट्टी की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, कटाव की मॉडलिंग (सॉयल इरोजन मॉडलिंग), कौन सा फसल लगायें, हाइड्रोलॉजी, ग्लोबल चेंज और उसकी निगरानी, मृदा और जल संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र का मॉडल (इकोलॉजी मॉडल), लैंड यूज, वाटरशेड मैनेजमेंट और पर्यावरण की गुणवत्ता शामिल हैं. कृषि कल्याण अभियान के तहत अब तक झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के 117 जिलों के 5,725 गांवों के आंकड़े जुटाये जा चुके हैं. इसमें झारखंड के 6 जिलों के 300 गांव शामिल हैं. पश्चिम बंगाल के पांच जिलों के 25-25 गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है. हालांकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस योजना को अपने राज्य में लागू नहीं करने देना चाहती थीं, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के बहुत समझाने के बाद मुर्शिदाबाद, बीरभूम, मालदा, नदिया समेत पांच जिलों के 25-25 गांवों को इसमें शामिल किया गया. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली संस्था भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण रांची के मृदा सर्वेक्षण पदाधिकारी दिनेश पटेल ने बताया कि पहले चरण में देश के 112 जिलों के 25-25 गांवों को शामिल किया गया था. दूसरे चरण में पांच और जिलों को शामिल किया गया. इस तरह 112 जिलों के 50-50 गांव इसमें शामिल हो गये. दूसरी तरफ, नये पांच जिलों के 25-25 गांव (कुल 125 गांव) इसमें जुड़ गये. इस तरह कुल गांवों की संख्या 5,725 हो गयी. कृषि कल्याण अभियान के तहत झारखंड के 18 जिलों को शामिल किया गया. इसमें 6 जिलों (रांची, गिरिडीह, दुमका, बोकारो, चतरा और गढ़वा) में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई. हर जिले के 50-50 गांवों को इसमें शामिल किया गया है. श्री पटेल ने बताया कि रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर, इसरो की संस्था स्पेश एप्लिकेशन सेंटर (अहमदाबाद), स्टेट सेंटर फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी और सॉयल एंड लैंड यूज सर्वे ऑफ इंडिया संयुक्त रूप से इसका नक्शा बनाने में जुटा है. श्री पटेल ने बताया कि राज्य सरकार से उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के आधार पर ये संस्थाएं डिजिटल नक्शा बनाने में जुटी हैं. श्री पटेल ने बताया कि इन गांवों के खेतों की मिट्टी की 12 पैरामीटर पर जांच की जा रही है. जल संसाधन के बारे में भी विस्तृत जानकारी जुटायी जा रही है. पूरी जानकारी एकत्र करने के बाद इसकी मैपिंग हो रही है. उसी के आधार पर डिजिटल नक्शा तैयार होगा और उसे संबंधित गांवों में लगाया जायेगा. श्री पटेल ने बताया कि मिट्टी की जांच के बाद उसकी कमियों का उपचार किया जायेगा और उसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण की रांची शाखा के प्रमुख और मृदा सर्वेक्षण पदाधिकारी दिनेश पटेल ने बताया कि इस योजना में राज्य सरकारों की भी मदद ली जा रही है. राज्यों के राजस्व और कृषि विभाग की मदद से यह डिजिटल नक्शा तैयार हो रहा है. राजस्व विभाग नक्शा उपलब्ध करा रहा है, जबकि कृषि विभाग को खाता और खेसरा संख्या और मिट्टी या उसकी जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराना है. एक बार पूरी जानकारी मिलते ही पूरे आंकड़े के साथ डिजिटल नक्शा तैयार कर उसे गांवों में टांग दिया जायेगा. इसके बाद कोई भी उस गांव की मिट्टी और जल संसाधन के बारे में पूरी जानकारी उस नक्शा से ले सकेगा. नक्शा वेबसाइट पर भी उपलब्ध होगा, जिसमें पूरा विवरण होगा. 80 से 100 हेक्टेयर की प्रोफाइलिंग योजना के मुताबिक, 80 से 100 हेक्टेयर भूमि की मिट्टी की कम से कम एक प्रोफाइल जरूर बनायी जायेगी. 200 से 500 मीटर की दूरी पर ऑगर बोर परीक्षण और उसकी सैंपलिंग की जायेगी. भूमि के नक्शा में मिट्टी की शृंखला, उसकी गहराई, सतह की मिट्टी की बनावट, स्लोप, मिट्टी का कटाव और सतह के बारे में जानकारी मसलन पत्थर, बजरी, कोयला का चार्ट भी शामिल होगा. सर्वे में शामिल रांची जिला के गांव दुमु (बेड़ो), खटंगा, सिरांगो, बनहौरा (कांके), सलसूद (सोनाहातू), उलीडीह, पालना, पेराडीह (तमाड़), भंडरिया (इटकी), रामपुर, ओबेरिया, सरवल (नामकुम), सोमू, ओझासाड़म, बाड़े, डंडिया (बुढ़मू), बांसजाड़ी (मांडर), हुरहुरी (चान्हो), अरमालटदाग (लापुंग), कोंका (खलारी), नरकोपी (बेड़ो), गारू (रातु), अरचोरा (नगड़ी), सिंघपुर (सिल्ली), बानपुर, गेतलसूद, रंगामाटी, ओबेर, बड़कीगोड़ांग, सोसोनावागढ़, नावागढ़, बदरी, लेपसार, धुरलेटा, सुरसू, पैलादा, जसपुर, बीसा, डोकाद, सीताडीह, हेसातु, अरवाबेड़ा, मुसागू, रेसनबेनादाग, कामता, सिंगारी, जाराडीह, साहेदा (सभी गांव अनगड़ा प्रखंड में), बिंजा और सारले (बुढ़मू प्रखंड). योजना में शामिल दुमका जिला के गांवों के नाम टिटमो, लकराघाटी, सोनवाडांगल, कुलसुनघाटा, गंगवारा, दोमोहानी, भालसुमर, भालकी, चित्रगरिया, धावा, तारनी, बमनखेता, सोनाधाप, चोरकाटा, गुमरो, सिरियामरा, भटुरिया, जाटपहाड़ी, जोगिया, अमरपुर, कारुडीह, पलासी, पतजोड़, दिघी, कुमीरडाहा, सरैया, मोहिला, बाकीडीह, ककानिया, मनियारपुर, नावाडीह, कुरुडीह, जगतपुर, सराईपानी, महतोटोला, जियापानी, महुबोना, धानकुटो, नकटी, कुसुंबा, कदमा, गामरो, पालमा, सिरुडीहा, बांकडीह, धारिया, राजबाध, बागीहोपा, सुगापहाड़ी और सुल्तानटिकर. गिरिहीड जिला के गांव, जिन्हें योजना में शामिल किया गया मंदारडीह, जरुआडीह, अम्बाडीह, गुरितानर, करमाटुंगरी, बरियाबाद, कसियाटोला, पोखरिया, सुगासर, घाटकुल, गोपाई, पालमो, हरिला, तारानारी, सिंगदाहा, बराई, धनाईपुर, सिहोडीह, चुंगलो, नाईकडीह, गंगापुर, पावापुर, गिरिडीह, जामजोरी, फिटकुरिया, बेरहाबाद, धुराईता, धुरगारागी, बाराटांड़, नवडीह, गोलैया, अम्बाटाड़, सिजुआ, तिल्याबानो, नावाडीह, बांदी, पेरसोन, टुकटुको, गनहोनिया, लुकईया, यास्को, कुलगो, साधा, चेरवा, सरुआ, संख, बादीडीह, नगवां और कोनी. किस जिले में मिट्टी के कितने सैंपल की हुई जांच जिला गांवों की संख्या पहले चरण में मिट्टी के कितने सैंपल की जांच हुई दूसरे चरण में मिट्टी के कितने सैंपल की जांच हुई बोकारो 25 608 588 चतरा 25 752 450 दुमका 25 492 585 गढ़वा 25 1357 338 गिरिडीह 25 358 429 रांची 25 888 644

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