औषधि पादप व वनस्पति औषधि निर्यात हेतु चीन से प्रतियोगिता नीति की आवश्यकता

औषधि पादप व वनस्पति औषधि निर्यात हेतु चीन से प्रतियोगिता नीति की आवश्यकता

Competing with China for Herbal , Medicinal Plants Export

Health Services Export Strategies -47

चिकित्सा सेवा निर्यात रणनीति – 47

उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति – 230

Medical Tourism development Strategies -230

उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 351

Uttarakhand Tourism and Hospitality Management -351

आलेख – विपणन आचार्य भीष्म कुकरेती

जागतिक आयुर्वेद या पादप औषधि व्यापार हेतु सबसे पहले चीन व्यापार नीति को समझना आवश्यक है। प्राचीन गढ़वाल , कुमाऊं , नेपाल व तिब्बत इतिहास की ओर झांकें तो आज भी कुछ नहीं बदला है। तिब्बत हिमाचल , गढ़वाल , कुमाऊं व नेपाल से हर समय सीमा रेखा पर झगड़ता रहता था किन्तु व्यवपार कभी बंद नहीं करता था। तिब्बत हेतु सीमा रेखा उलझाव व व्यापार दो अलहदा विचार थे। आज चीन भी यही नीति अपनाये है। आज भारतीय ब्रैंड मालिक कुछ नहीं चीन के हाइली पेड कुरियर ब्यॉय का काम कर रहे हैं। चीन व भारत का व्यापार असंतुलन उच्च स्तर पर पंहुच चूका है। चीन का भारत निर्यात व भारत का चीन को निर्यात में 63 बिलियन US $ का अंतर् है और भारत बार बार चीन के समक्ष यह मुद्दा उठा रहा है किन्तु इतिहास अपने को दुहरा रहा है। तिबत -गढ़वाल में भी यही होता रहा है। चीन बहुत से भारतीय उद्यमों /निर्यात जैसे आईटी , मीट , दवाईयों में रोड़े नहीं हटा रहा है। हाँ भारतीय चावल आयात पर टैक्स बैरियर हटा दिया गया है।
यही नहीं बहुत से उद्यमों में चीन अपने संसाधनों के बल पर व टैक्स नीति के बल पर वैश्विक व्यापार में भारत से कहीं आगे जा चुका है। इसमें दोष चीन का नहीं अपितु भारतीय राज्यों का अधिक है जो चीन के साथ प्रतियोगिता को तब्बजो नहीं देते हैं।
चीन -भारत पादप औषधि निर्यात में अंतर

औषधि पादप व पादप औषधि निर्यात व्यापार का उदाहरण ही ले लें तो पाएंगे कि चीन व भारत हर्बल मार्किट में शीसरह स्थान पर हैं। किन्तु व्यापार में चीन व भारत का अनुपात है US $ 5 बिलियन : US $ 240 मिलियन।
यही नहीं औषधि पपादपों का लोक औषधि निर्माण (folk medicines ) में प्रयोग का भी अंतर् है। एक अनुमान से –
चीन में 10000 से 11225 वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है
भारत में 7500 वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है
मेक्सिको में 2237 वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है
उत्तरी अमेरिका में 2572 वनस्पति प्रजातियों से औषधि प्रयोग होती है
एक अन्य अंतर भी स्पष्ट है –
500 -600 पादप परम्परागत चीनी औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
1430 पादप परम्परागत मंगोली औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
1106 -3600 पादप परम्परागत तिब्बती औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
1250 -1400 पादप आयुर्वेद औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
342 पादप परम्परागत यूनानी औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
328 पादप परम्परागत सिद्ध औषधि निर्माण में प्रयोग होते हैं
उपरोक्त संख्या विश्लेषण से सिद्ध होता है कि भारत में कई ऐसे पादप है जो लोक औषधियों में प्रयोग होते हैं किन्तु उन पादपों का वैज्ञानिक या औषधीय परीक्षण नहीं हुआ है।

प्रत्येक राज्य को चीन से पर्तिस्पर्धा करनी होगी उत्तराखंड को भी

यह सही है कि चीन से सीधी टक्क्र कठिन है और विपणन नीति तहत सही भी नहीं है किन्तु पर्तिस्पर्धा तो करनी ही पड़ेगी और प्रत्येक राज्य को आयुर्वेद , यूनानी , सिद्ध औषधि या पादप निर्यात हेतु चीन से प्रतिष्पर्धा हेतु नीति बनानी ही होगी।

उत्तराखंड को तो आयुर्वेद निर्यात व औषधि पादप निर्यात को सबसे अधिक महत्व देने की आवश्यकता है और इसके लिए चीन की पादप औषधि निर्यात रणनीति का गहन अध्ययन आवश्यक है। उत्तराखंड सरकार को बांज पड़े खेतों में औषधि पादप उत्पादन को तुरंत कार्य जामा पंहुचना आवश्यक है। आयुर्वेद निर्माणशालाएँ व् औषधि पादप उत्पादन ही उत्तराखंड के पास सही विकल्प हैं -विकास हेतु।

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