उच्च हिमालयी क्षेत्रों में घट रही ठंड

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में घट रही ठंड

 

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड घटती जा रही है। यहां ऊंचाई के साथ ही तापमान गिरने की दर कम होती जा रही है। यानी इन इलाकों में टेंपरेचर लैप्स रेट (टीएलआर) घट रहा है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरनाक दुष्प्रभाव माना जा रहा है। नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज के तहत तीन राज्यों में किए गए शोध में यह चिंताजनक पहलू सामने आया है। उत्तराखंड के साथ ही जम्मू-कश्मीर और सिक्किम में 16 जगहों पर पिछले कुछ साल के डाटा और तीन माह की मॉनीटरिंग से टीएलआर का आकलन किया गया। इस दौरान यह तथ्य सामने आया कि टीएलआर की दर घट रही है। जम्मू कश्मीर में यह दर सालाना औसतन करीब 0.67, उत्तराखंड में 0.52 और सिक्किम में 0.50 प्रति सौ मीटर पाई गई। उत्तराखंड के तुंगनाथ में यह दर कई साल से 0.53 से 0.51 प्रति सौ मीटर के बीच स्थिर मिली। शोध में यह भी सामने आया है कि ट्री-लाइन में आ रहे बदलाव और हिमालय की कई वनस्पतियों में बदलाव के चलते टीएलआर में भी परिवर्तन आ रहा है। इसके लिए विस्तृत शोध की जरूरत है।

ग्लोबल वॉर्मिंग का ज्यादा असर: शोध में यह भी सामने आया कि 3000 से 4900 मीटर ऊंचाई पर ग्लोबल वॉर्मिंग निम्न हिमालयी क्षेत्रों से ज्यादा है। ग्लोबल औसत से करीब 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा तापमान यहां बढ़ रहा है।

प्रारंभिक और शार्ट टर्म शोध में पता चला कि ऊंचाई के साथ ठंड बढ़ने की दर कम होती जा रही है। टेंपरेचर लैप्स रेट में आ रहा बदलाव ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे बड़ा और चिंताजनक प्रभाव है। इसके कारणों और इससे बचने के उपाय सोचना बेहद जरूरी है।
प्रोफेसर एसपी सिंह, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर, सेंट्रल हिमालयन इन्वायरमेंट एसोसिएशन नैनीताल

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