इनर लाइन से बाहर होंगे चीन सीमा से सटे नेलांग व जादूंग गांव

क्या है इनर लाइन

दूसरे देशों की सीमा के नजदीक का वह क्षेत्र जो सामरिक दृष्टि से महत्व रखता हो, इनर लाइन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में केवल स्थानीय लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। पर्यटकों को वहां जाने के लिए इनर लाइन परमिट जारी होता है। हालांकि, इसके बाद भी वे एक तय सीमा तक ही इनर लाइन क्षेत्र में घूम सकते हैं।

डॉ.नेगी के अनुसार आयोग यहां के पर्यटन विकास की कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसमें सुझाव दिया जा रहा कि नेलांग व जादूंग को इनर लाइन से बाहर करते हुए इसे भारतीय नागरिकों के लिए खोला जाए। इससे पर्यटन विकास को पंख लगने के साथ ही स्थानीय लोगों की आर्थिकी भी संवरेगी। अलबत्ता, विदेशी नागरिकों के लिए इनर लाइन परमिट की व्यवस्था बरकरार रखी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि आयोग जल्द ही यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगा। फिर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद को भेजेगी। इनर लाइन के बारे में निर्णय केंद्र सरकार को ही लेना है।

कोशिशें रंग लाईं तो चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी के नेलांग और जादूंग गांव इनर लाइन से बाहर होंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के निर्देश पर इस क्षेत्र का दौरा करने के बाद अब ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग इस बारे में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने जा रहा है। फिर सरकार इसे केंद्र को भेजेगी। आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी के मुताबिक नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण नेलांग व जादूंग क्षेत्र में पर्यटन विकास के दृष्टिगत भारतीय नागरिकों के लिए इसे इनर लाइन से मुक्त किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे देश के गांवों पर ध्यान केंद्रित किया है। इस कड़ी में परिषद की टीम ने उत्तराखंड का दौरा कर चीन सीमा से सटे चार विकासखंडों धारचूला, मुनस्यारी, जोशीमठ व भटवाड़ी के गांवों से पलायन समेत अन्य बिंदुओं पर जानकारी ली। पिछले माह परिषद ने दिल्ली में बैठक भी बुलाई, जिसमें ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी ने शिरकत की। परिषद ने चीन सीमा से सटे गांवों के विकास को कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए।इसी क्रम में पलायन आयोग की टीम ने नेलांग व जादूंग का 14 से 16 अक्टूबर तक दौरा किया। वहां से लौटने के बाद आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.नेगी ने बताया कि 1962 के युद्ध के दौरान यह दोनों गांव खाली करा दिए गए थे। वहां के निवासी हर्षिल, डुंडा, बगोड़ी समेत अन्य स्थानों पर रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से असीम संभावनाओं वाला है, मगर इनर लाइन की बंदिशों से पर्यटन विकास की मुहिम परवान नहीं चढ़ पा रही है।

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