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बचपन में ही आंखों की रोशनी खो चुकीं सुप्रिया ने दुश्वारियों का इतना डटकर सामना किया कि खुद को कम आंकने वाले दिव्यांगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गईं।

  1. उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत दिव्यांग सुप्रिया को हालही में समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य ने एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया है। इप्टा समेत कई संस्थाओं की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

    नौ साल की उम्र में यूपी के सीतापुर निवासी सुप्रिया की आंखों की रोशनी कम होने लगी और 16 साल की उम्र में उन्हें दिखना बंद हो गया। कई शहरों के कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन फायदा नहीं हुआ।

    बेटी को परेशानी न हो, यह सोचकर माता-पिता ने जब उनका स्कूल जाना बंद करवा दिया, तो वह खूब झगड़ीं और किसी तरह दसवीं की परीक्षा पास की। लेकिन फिर ऐसा विपरीत समय आया, जब आंखों की रोशनी बिल्कुल चली गई। परिजनों, नाते-रिश्तेदारों समेत आस-पड़ोस के लोगों ने उन्हें दया भरी नजरों से देखना शुरू कर दिया, साथ ही यह भी मान लिया कि वो अब कुछ नहीं कर पाएंगी।


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By udaen

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