अध्यापक बनकर समाज में शिक्षा की अलख जगाएंगे, मन की आंखों से दुनिया दिखती है सुंदर

पक्का इरादा हो तो मनुष्य निश्चित ही सफलता की बुलंदियों पर पहुंचता है। सभी मुसीबतों से जूझते हुए मंजिल की ओर बढ़ने में सफलता महराजगंज जिले के दिव्यांग छात्र अरूण कुमार चौरसिया ने हासिल किया है। उन्हें आंख से नहीं दिखता है। लेकिन मन की आंखों से दुनिया को देखते हैं। बीएड का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो दिव्यांग अरूण की अपनी प्रतिभा सभी ने जाना। उन्हें मिली सफलता से परिजन ही नहीं क्षेत्र के लोग भी खुश हैं।

मध्यम वर्गिय परिवार में पले बढ़े अरूण को घर के सभी सदस्यों ने आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्हें कभी एहसास नहीं होने दिया कि वह दिव्यांग हैं। घर से मिले हौसले और गुरूजनों की प्रेरणा से बीएड की प्रवेश परीक्षा में उत्तर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने करने में कामयाब हुए।

जिले के लक्ष्मीपुर ब्लॉक के बकैनिया हरैया गांव के रहने अरूण कुमार चौरसिया इन दिनों सुर्खियों में हैं। उन्होंने बीएड की प्रवेश परीक्षा में उत्तर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है।

उनके पिता शारदा प्रसाद चौरसिया, माता गंगोत्री देवी ने खुशी जाहिर की। इन लोगों ने कहा कि बेटे को मिली सफलता से बेहद खुशी हो रही है। वह निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा। बड़े भाई शक्ति कुमार चौरसिया, महेश्वरी चौरसिया भाई को मिली सफलता से खुशी है।

सबसे छोटा भाई बेद प्रकाश एमजी इंटर कालेज गोरखपुर में 9 वीं का छात्र है। परिवार के सभी सदस्य पढ़े लिखे हैं। बड़े भाई बीएससी कर प्राइवेट अध्यापक हैं तो मझले भाई एमआर हैं।

अरूण गांव के प्राईमरी स्कूल में पढ़ाई के बाद गोरखपुर राजकीय स्पर्श इंटर कॉलेज लाल डिग्गी चले गए। यहां 6 से 12 वीं तक की शिक्षा हासिल की। इसके बाद वर्ष 2013 में बीएचयू वाराणसी में चले गए। यहां इतिहास से एमए प्रथम वर्ष में पाचवां स्थान मिला है। इस वर्ष एमए द्वितीय वर्ष में हैं।

अरूण ने बताया कि मन की आंखो से दुनिया बहुत अच्छी दिखती है। अध्यापक बनकर समाज में शिक्षा की अलख जगाना चाहता हूं। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। चेस पसंदीदा खेल है। पीएम मोदी अच्छे नेता लगते हैं।

उन्होंने बताया कि चार एकड़ खेती है। परिवार के सभी सदस्यों ने हमेशा उत्साह बढ़ाया जिससे आगे बढ़ने में मदद मिली। रामकृष्ण परमहंस को अपना आर्दश मानने वाले अरूण कुमार चौरसिया मिली सफलता पर खुशी से गदगद हैं।

उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए कोई निर्धारित समय नहीं रहा। जब मन किया तभी पढ़ना शुरू हो गए। पढ़ाई को बोझ बनाकर कभी नहीं पढ़ा।

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