मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में क्षत्रिय जागरण स्मारिका 202021 का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में क्षत्रिय जागरण स्मारिका 202021 का विमोचन किया।   मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में क्षत्रिय जागरण स्मारिका 202021 का विमोचन किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस स्मारिका में पौराणिक एवं समसामयिक घटनाओं का सही समावेश किया गया है। देश की रक्षा […]

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दिलाराम चैक स्थित जल संस्थान कार्यालय से स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दिलाराम चैक स्थित जल संस्थान कार्यालय से स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत यह एक अच्छी शुरूआत हुई है। इलेक्ट्रिक बस से प्रदूषण भी कम होगा और लोगों की यात्रा भी सुलभ होगी। 05 इलेक्ट्रिक बसों को मुख्यमंत्री ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। स्मार्ट सिटी में चलने वाली इन बसों में 25 सीटें सामान्य लोगों के लिए एवं दिव्यांग व्यक्तियों के लिए व्हील चेयर खड़ी करने के लिए स्थान की सुविधा उपलब्ध है। इलेक्ट्रिक बस में फ्रंट और रियर एयर सस्पेंशन की सुविधा उपलब्ध है। यह बस वातानुकूलित है, इसमें जी.पी.एस. सिस्टम, 03 सीसीटीवी कैमरा, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन, आई.टी.एस. डिस्प्ले, हर सीट में यूएसबी पोर्ट, आपातकालीन बटन, इमरजेंसी हैमर, अग्निशमन यंत्र एवं रिजनरेशन सिस्टम की सुविधा है। इस अवसर पर सांसद श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह, मेयर श्री सुनील उनियाल गामा, विधायक श्री हरबंस कपूर, श्री विनोद चमोली, श्री गणेश जोशी एवं सीईओ स्र्माअ सिटी/ जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे। सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दिलाराम चैक स्थित जल संस्थान कार्यालय से स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का शुभारम्भ किया।   मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दिलाराम चैक स्थित जल संस्थान कार्यालय से स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी […]

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में जनपद में संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की गहनता से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में जनपद में संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की गहनता से समीक्षा की।   अपने तयशुदा कार्यक्रमानुसार सूबे के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में जनपद में संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की गहनता से समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उच्च शिक्षा […]

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उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से किया राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी की डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारम्भ।

उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से किया राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी की डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारम्भ।   उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से किया राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी की डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारम्भ। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह […]

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शुक्रवार को सचिवालय में सूफी संत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के अजमेर में चल रहे 809 वे वार्षिक उर्स के अवसर पर सद्भावना चादर भेजते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा की प्रदेश में शांति, विकास तथा प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा की कामना के साथ गत वर्षों की भांति सद्भावना चादर अजमेर भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि भारत मे आदि काल से सूफी, संतों व ऋषियों ने मानवता के कल्याण के लिए अपने जीवन को समर्पित कर वसुधैव कुटुम्बकम के संदेश को पूरे विश्व में फैलाया है। शुक्रवार को सचिवालय में सूफी संत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के अजमेर में चल रहे 809 वे वार्षिक उर्स के अवसर पर सद्भावना चादर भेजते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा की प्रदेश में शांति, विकास तथा प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा की कामना के साथ गत वर्षों की भांति सद्भावना चादर अजमेर भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास तथा सबका विश्वास के अनुसार उत्तराखंड में गत 4 वर्षों में सभी वर्गों व समुदायों के कल्याण के लिए योजनाओं को लागू किया गया तथा भविष्य में भी ये जारी रहेंगी।यह चादर लेकर दरगाह पीरान कलियर उर्स कमेटी के संयोजक व शायर अफ़ज़ल मंगलोरी व अन्य सदस्य अजमेर जाएंगे जो 22 फरवरी को दरगाह ख़्वाजा साहब में पेश की जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ नरेंद्र सिंह, ओ एस डी धीरेंद्र पवार , पिरान कलियर से मनेजर मो हारून, सदस्य इरशाद खान व समीर खान आदि मौजूद रहे। सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग।

शुक्रवार को सचिवालय में सूफी संत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के अजमेर में चल रहे 809 वे वार्षिक उर्स के अवसर पर सद्भावना चादर भेजते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा की प्रदेश में शांति, विकास तथा प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा की कामना के साथ गत वर्षों की भांति सद्भावना चादर अजमेर भेजी जा रही है। […]

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उप राष्ट्रपति सचिवालय मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा बच्चों के स्वाभिमान और रचनाशीलता को बढ़ावा दे सकती है: उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने मातृभाषा के पुनरुत्थान और प्रगति के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया प्रशासन की भाषा लोगों की भाषा होनी चाहिए: उपराष्ट्रपति भाषा की महत्वपूर्ण विरासत को नष्ट हो जाने से बचाएं: श्री नायडू बहुभाषावाद राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ कर सकता है: उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ के अवसर पर वेबिनार का शुभारंभ किया प्रविष्टि तिथि: 21 FEB 2021 2:51PM by PIB Delhi उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज कम से कम कक्षा 5 तक मातृभाषा को शिक्षा का प्राथमिक माध्यम बनाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी बच्चे को ऐसी भाषा में शिक्षा देना, जो घर पर नहीं बोली जाती, विशेष रूप से प्राथमिक चरण में उसके सीखने में एक बड़ी बाधा हो सकती है। श्री नायडू ने विविध अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के प्रारंभिक चरणों में मातृभाषा के जरिए पढ़ाना बच्चे के स्वाभिमान को बढ़ावा दे सकता है और उसकी रचनाशीलता में वृद्धि कर सकता है। नई शिक्षा नीति को एक दूरदर्शी और प्रगतिशील दस्तावेज मानते हुए, उन्होंने इस नीति को वास्तविक अर्थों में लागू करने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित वेबिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मातृभाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया। प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा के उपयोग पर बल देने के अतिरिक्त अन्य रेखांकित क्षेत्र हैं- प्रशासन, अदालती कार्यवाहियों में और उनमें निर्णय देने के लिए स्थानीय भाषाओं का उपयोग। उन्होंने उच्च और तकनीकी शिक्षा में स्वदेशी भाषाओं के उपयोग में क्रमिक वृद्धि की भी इच्छा व्यक्त की। अंतिम जोर इस बात पर था कि प्रत्येक व्यक्ति अपने घरों में गर्वपूर्वक और प्राथमिकता के साथ अपनी मातृभाषा का उपयोग करे। श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि सैकड़ों भाषाओं के एक साथ अस्तित्व में बने रहने से भाषाई विविधता हमारी प्राचीन सभ्यता की आधारशीलाओं में एक है। यह देखते हुए कि हमारी मातृभाषाएं लोगों में भावनात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकती हैं, श्री नायडू ने उन्हें ‘हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण कड़ी’, ‘हमारे सामूहिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता का भंडार’ माना और कहा कि इसीलिए उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और संवर्धित किए जाने की आवश्यकता है। शासन में मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री नायडू ने सुझाव दिया कि हम विशेष रूप से राज्य और स्थानीय स्तरों पर उनके उपयोग को बढ़ा सकते हैं। शासन के एक समावेशी मॉडल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “आम व्यक्ति के साथ केवल वैसी भाषा में संवाद, जिसे वह समझता है, करने से हम उसे शासन एवं विकास की प्रक्रिया में शामिल कर सकते हैं। प्रशासन की भाषा लोगों की भाषा होनी चाहिए।” यह सुझाव देते हुए कि भाषा-समावेश उच्च स्तर पर भी होना चाहिए, श्री नायडू ने राज्यसभा का उदाहरण दिया, जहां इसके सदस्यों के लिए 22 अनुसूचित भाषाओं में से किसी में भी खुद को व्यक्त करने का प्रावधान किया गया है। इससे पूर्व, अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस के अवसर पर हैदराबाद में मुछिंथल में स्वर्ण भारत ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में भी स्वदेशी भाषाओं के उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने आम आदमी के लिए सुलभ होने के लिए न्यायपालिका और न्यायालयों में स्थानीय भाषाओं की जरूरत रेखांकित की। वेबिनार में, श्री नायडू ने विलुप्तप्राय भाषाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई, जिन पर स्थायी रूप से नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। वैश्वीकरण और एकरूपता को इसका कारण बताते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्रसंघ की चेतावनी को दोहराया कि हर दो सप्ताह पर एक भाषा अपनी पूरी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के साथ लुप्त हो जाती है। उन्होंने रेखांकित किया कि 196 भाषाओं के साथ भारत में लुप्तप्राय भाषाओं की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। श्री नायडू ने इस संबंध में शिक्षा मंत्रालय की विलुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए योजना (एसपीपीईएल) की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बहुभाषावाद के महत्व पर बोलते हुए सुझाव दिया कि हम अपनी मातृभाषा में एक मजबूत नींव के साथ, जितनी संभव हो उतनी भाषाएं सीख सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों को इसके लिए प्रोत्साहित करने की अपील की कि वे अपनी मातृभाषा के अतिरिक्त एक राष्ट्रीय और एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा सीखें। श्री नायडू ने कहा कि जैसा कि कई अध्ययनों से प्रदर्शित होता है, इस तरह के भाषाई कौशल से बच्चों में बेहतर ज्ञान संबंधी विकास हो सकता है। इसके अतिरिक्त, उपराष्ट्रपति ने कहा कि अन्य भाषाओं का ज्ञान सांस्कृतिक सेतुओं के निर्माण में सहायता कर सकता है और अनुभव की नई दुनिया की खिड़कियां खोल सकता है। श्री नायडू ने कहा कि एक दूसरे की भाषाओं के प्रति स्वस्थ सम्मान और दिलचस्पी के साथ हम राष्ट्रीय एकता और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” को बढ़ावा दे सकते हैं। इस अवसर पर श्री नायडू ने राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, भारतवाणी परियोजना और एक भारतीय भाषा विश्व विद्यालय (बीबीवी) की प्रस्तावित स्थापना और भारतीय अनुवाद एवं व्याख्या संस्थान (आईआईटीटी) जैसे एक बहुभाषी समाज के लिए विभिन्न सरकारी पहलों की सराहना की। अंत में, उपराष्ट्रपति ने दोहराया कि भाषाओं को निरंतर उपयोग से ही पोषित किया जाता है और प्रत्येक दिन एक मातृभाषा दिवस होना चाहिए। उन्होंने मातृभाषाओं का उद्धार करने तथा घरों, समुदाय, बैठकों और प्रशासन में ‘एक-दूसरे की मातृभाषा में स्वतंत्र रूप से तथा आत्मविश्वास के साथ बात करने में गर्व महसूस करने’ के लिए सर्वांगीण प्रतिबद्धता और प्रयासों की अपील की। इस अवसर पर श्री नायडू ने अंतर्राष्ट्रीय आभासी सुलेखन प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल, माननीय संस्कृति मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल और माननीय शिक्षा राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे, आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सचिदानंद जोशी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

उप राष्ट्रपति सचिवालय मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा बच्चों के स्वाभिमान और रचनाशीलता को बढ़ावा दे सकती है: उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने मातृभाषा के पुनरुत्थान और प्रगति के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया प्रशासन की भाषा लोगों की भाषा होनी चाहिए: उपराष्ट्रपति भाषा की महत्वपूर्ण विरासत को नष्ट हो जाने से बचाएं: श्री नायडू बहुभाषावाद […]

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उप राष्ट्रपति सचिवालय उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को अनोखे तरीके से मनाया उपराष्ट्रपति ने 22 भारतीय भाषाओं में ट्वीट्स किए और मातृ भाषाओं को प्रोत्साहन की आवश्यकता पर 24 स्थानीय अखबारों में लेख लिखे इस दिवस पर आयोजित तीन कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति ने हिस्सा लिया प्रविष्टि तिथि: 21 FEB 2021 2:45PM by PIB Delhi उपराष्ट्रपति श्री वैंकेया नायडू ने आज अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस को अनोखे तरीके से मनाया। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में ट्वीट्स किए और देश के 24 स्थानीय अखबारों में मातृ भाषाओं को प्रोत्साहन की अहमियत पर लेख भी लिखे। श्री वैंकेया नायडू, जो मातृ भाषाओं को प्रोत्साहन देने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने अपनी ट्वीट्स में कहा कि भाषागत विविधता हमारी संस्कृति की नींव का महत्वपूर्ण स्तंभ रही है। उन्होंने कहा, “ये भाषाएं न सिर्फ संचार का माध्यम हैं बल्कि ये हमें हमारी विरासत से हमें जोड़ती हैं और हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को भी परिभाषित करती हैं।” प्राथमिक शिक्षा से लेकर शासन व्यवस्था, हर क्षेत्र में मातृ भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दिए जाने पर जोर देते हुए श्री नायडू ने ट्वीट में कहा,”हमें अपनी मातृ भाषाओं में बातों और विचारों के रचनात्मक प्रकटीकरण को प्रोत्साहित करना चाहिए। ” श्री नायडू ने तेलुगू, तमिल, हिंदी, गुजराती, कश्मीरी, कोंकणी, मराठी, उड़िया, उर्दू, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी, नेपाली, असमी, बंगाली, मणिपुरी, बोडो, संथली, मैथिली, डोगरी और संस्कृत भाषाओं में ट्वीट्स किए। उपराष्ट्रपति की कलम से लिखे गए लेख द टाइम्स ऑफ इंडिया (अंग्रेजी) और 24 अन्य भारतीय स्थानीय भाषायी अखबारों में छपे हैं। इनमें दैनिक जागरण (हिंदी), इनाडू (तेलुगू), दिना थांथी (तमिल), लोकमत (मराठी), समाज (ओड़िया), सियासत (उर्दू), आदाब तेलंगाना (उर्दू), असोमिया प्रतिदिन (असमी), नवभारत टाइम्स (मैथिली), मातृभूमि (मलयालम), दिव्य भास्कर (गुजराती), वर्तमान (बंगाली), भांगर भुइं (कोंकणी), हायेननि रादाब (बोडो), संथाल एक्सप्रेस (संथाली), हिमाली बेला (नेपाली), हमरो वार्ता (नेपाली), दैनिक मिरमिरे (नेपाली), हमरो प्रजा शक्ति (नेपाली), हिंदू (सिंधी), जोति डोगरी (डोगरी), डेली काहवत (कश्मीरी), डेली संगारमल (कश्मीरी), सुधर्म (संस्कृत) अखबार शामिल हैं। श्री नायडू ने शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक वेबिनार में हिस्सा लेकर भी अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस मनाया। इस अवसर पर हैदराबाद के स्वर्ण भारत ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति बतौर मुख्यातिथी शामिल हुए। इसके बाद वे तेलुगू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘मातृभाषोभव’ में भी ऑनलाइन शामिल होंगे। इससे पहले 16 फरवरी 2021 को उपराष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों के 771 सांसदों को मातृ भाषाओं के प्रोत्साहन को बढ़ावा देने हेतू लिखा था।

उप राष्ट्रपति सचिवालय उपराष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को अनोखे तरीके से मनाया उपराष्ट्रपति ने 22 भारतीय भाषाओं में ट्वीट्स किए और मातृ भाषाओं को प्रोत्साहन की आवश्यकता पर 24 स्थानीय अखबारों में लेख लिखे इस दिवस पर आयोजित तीन कार्यक्रमों में उपराष्ट्रपति ने हिस्सा लिया उपराष्ट्रपति श्री वैंकेया नायडू ने आज अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा […]

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संत रविदासजी जैसे महान संत समस्त मानवता के हैं: राष्ट्रपति कोविंद

राष्ट्रपति सचिवालय संत रविदासजी जैसे महान संत समस्त मानवता के हैं: राष्ट्रपति कोविंद राष्ट्रपति ने ‘श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ राष्ट्रीय अधिवेशन-2021’ में भाग लिया राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि संत रविदासजी जैसे महान संत समस्त मानवता से संबंधित हैं। वह आज (21 फरवरी, 2021) नई दिल्ली में ‘श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ राष्ट्रीय अभियान-2021’ को […]

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संस्‍कृति मंत्रालय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का दूसरा चरण दार्जिलिंग में 22 से 24 फरवरी तक मनाया जाएगा प्रविष्टि तिथि: 21 FEB 2021 3:58PM by PIB Delhi केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल राष्ट्रीय संस्कृत महोत्सव के दूसरे चरण का उद्घाटन 22 फरवरी, 2021 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के राजभवन में करेंगे। यह महोत्सव 22 फरवरी से 24 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री जगदीप धनखड़ 24 फरवरी, 2021 को समापन समारोह में उपस्थित रहेंगे। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। दार्जिलिंग में तीन दिवसीय समारोह कार्यक्रम ओडिसी विजन एंड मूवमेंट सेंटर द्वारा नृत्य कला संबंधी प्रस्तुति के साथ आरम्भ होगा, इसके बाद डोना गांगुली (ओडिसी), माइकल (सैक्सोफोन), शायनी हाइरापिएट (बैंड) द्वारा गायन प्रस्तुति की जाएगी। दूसरे दिन, सौनक चट्टोपाध्याय द्वारा रवींद्र संगीत गायन की प्रस्तुति होगी, सैफायर नृत्य मंडली द्वारा एक रचनात्मक नृत्य गायन, डैनियल एंगती के नॉर्थ ईस्टर्न बैंड और कामरान तथा बॉयज़ बैंड का आयोजन होगा। अंतिम दिन अनुत्तम बाउल द्वारा बेल गीतों के साथ शुरू होगा, इसके बाद संस्कृति श्रेयस्कर द्वारा कथक बैलेट और एक नृत्य नाटिका आयोजित होगी। प्रत्येक दिन स्थानीय कलाकारों को आरएसएम मंच पर प्रदर्शन करने का अवसर दिया जाएगा। वास्तविक रूप से तैयार किए गए हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित करते हुए देश भर के 20 शिल्प स्टॉल लगाए जाएंगे। संस्कृति मंत्रालय पर मूर्त और अमूर्त दोनों ही प्रकार की भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार कार्य की जिम्मेदारी है, जिनमें अन्य बातों के अलावा पारंपरिक लोक नृत्य और कला रूपों, ललित कलाओं और समृद्ध जनजातीय धरोहर शामिल हैं। यह इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों, त्योहारों और नाट्यशाला संबंधी प्रदर्शनों का आयोजन करता है। सात क्षेत्रीय संस्कृति केंद्रों की सक्रिय भागीदारी के साथ 2015 से आयोजित इस मंत्रालय का प्रमुख उत्सव राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव, भारत की जीवंत संस्कृति को सभामंडपों और रंगमहलों तक सीमित रखने के बजाय जन-जन तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के पोषित लक्ष्य को सुदृढ़ करते हुए अन्य राज्यों में एक राज्य के लोक और जनजातीय कला, नृत्य, संगीत, खाद्य व्यंजन और संस्कृति को प्रदर्शित करने में केन्द्रीय भूमिका निभाता रहा है और साथ ही कलाकारों तथा कारीगरों को उनकी आजीविका में सहायता करने के लिए एक प्रभावी मंच भी प्रदान करता रहा है। नवंबर, 2015 से अभी तक विभिन्न राज्यों और दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु, तवांग, गुजरात, कर्नाटक, टिहरी और मध्य प्रदेश जैसे शहरों में आरएसएम के दस संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं। स्थानीय कलाकारों सहित विख्यात कलाकार इस प्रमुख उत्सव का हिस्सा होंगे। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव -2021 में लोक-कला रूपों की प्रचुरता होगी और यह स्थापित तथा उभरते हुए कलाविज्ञान में सर्वश्रेष्ठ अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा। आरएसएम भारत के संदर्भ में लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी स्वदेशी संस्कृति, इसकी बहुआयामी प्रकृति, भव्यता, समृद्धि और ऐतिहासिक महत्व के साथ सहस्राब्दियों से चले आ रहे एक राष्ट्र के रूप में फिर से जोड़ देगा। पश्चिम बंगाल में आयोजित किया जा रहा यह आरएसएम विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के बीच आपसी समझ और संबंधों को बढ़ाएगा, जिससे भारत की एकता और अखंडता और सुदृढ़ होगी।

संस्‍कृति मंत्रालय राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का दूसरा चरण दार्जिलिंग में 22 से 24 फरवरी तक मनाया जाएगा केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल राष्ट्रीय संस्कृत महोत्सव के दूसरे चरण का उद्घाटन 22 फरवरी, 2021 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के राजभवन में करेंगे। यह महोत्सव 22 फरवरी से 24 फरवरी […]

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अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में 26वें ‘हुनर हाट’ का औपचारिक उद्घाटन किया

अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में 26वें ‘हुनर हाट’ का औपचारिक उद्घाटन किया केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘हुनर हाट’ को 20 फरवरी से 1 मार्च 2021 के बीच आयोजित किया जा रहा है ‘लोकल टू ग्लोबल’ थीम पर आधारित ‘हुनर हाट’ में […]

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